नशा मुक्ति पर बड़ा कदम, 10 हजार स्वास्थ्यकर्मी होंगे प्रशिक्षित

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नशा मुक्ति पर बड़ा कदम, 10 हजार स्वास्थ्यकर्मी होंगे प्रशिक्षित


- जेपी नड्डा ने किया क्षमता निर्माण कार्यक्रम का शुभारंभ

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (हि.स.)।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-1 में नशा मुक्ति सेवाओं से जुड़े चिकित्सा एवं संबद्ध स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता निर्माण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल के तहत मार्च 2029 तक देशभर में 10,000 स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कार्यक्रम का उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन से संबंधित विकारों की पहचान, आकलन, उपचार और प्रबंधन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ाना है। इसके अंतर्गत डॉक्टरों, मेडिकल अधिकारियों, नर्सों, काउंसलरों, मनोवैज्ञानिकों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस अवसर पर जेपी नड्डा ने कहा कि वर्ष 2029 तक नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक कल्याण और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

यह कार्यक्रम जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी नारकोटिक कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026–2029 के अनुरूप संचालित किया जाएगा। इसके तहत स्वास्थ्य मंत्रालय चालू वित्त वर्ष में 2,000, वर्ष 2027-28 में 3,000 और वर्ष 2028-29 में 5,000 सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करेगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम छह केंद्रीय संस्थानों के माध्यम से संचालित होगा। इनमें एम्स नई दिल्ली, गाजियाबाद, निम्हंस बेंगलुरु, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान रांची, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली और एम्स भुवनेश्वर शामिल हैं। इस पहल का समन्वय एम्स करेगा।

कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन लाइव सत्र, स्व-गति ऑनलाइन पाठ्यक्रम और पांच दिवसीय प्रत्यक्ष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों के लिए 12 सप्ताह तक साप्ताहिक ऑनलाइन सत्र आयोजित होंगे। पाठ्यक्रम में शराब, गांजा, ओपिओइड, नींद की गोलियों और इनहेलेंट्स के सेवन से संबंधित विकारों के उपचार के साथ महिलाओं और किशोरों की विशेष जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इस दौरान जेपी नड्डा ने नशे के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों पर तैयार मैन्युल के दूसरे संस्करण का भी विमोचन किया। वर्ष 2005 में पहली बार प्रकाशित इस पुस्तिका को नशे की लत से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी, उपचार पद्धतियों और चिकित्सा सेवाओं में हुए बदलावों के अनुरूप संशोधित किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

Livevns.news Desk
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