बैंक घाेटाले में सेवानिवृत्ति वाले दिन आईएएस अधिकारी गिरफ्तार
- सीबीआई ने की तीसरी बड़ी गिरफ्तारी- प्रदूषण कंट्राेल बाेर्ड में रहते 169 करोड़ का घोटाला करने का आरोप
चंडीगढ़, 30 जून (हि.स.)। सीबीआई ने बहुचर्चित बैंक घोटाले में कार्रवाई करते हुए मंगलवार को सेवानिवृत्ति के दिन आईएएस प्रदीप कुमार को
169 करोड़ के सबसे बड़े सरकारी फंड डायवर्जन का आरोप
में गिरफ्तार कर लिया। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के तत्कालीन सदस्य सचिव एवं आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार इस घोटाले की अहम कड़ी माने जा रहे हैं। अहम बात यह है कि मंगलवार को ही वे सेवानिवृत्त होने वाले थे। इस फ्रॉड केस में सीबीआई ने दो बैंक अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया है।
सीबीआई का आरोप है कि प्रदीप कुमार ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 169 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के डायवर्जन में उनकी सीधी भूमिका सामने आई है। यह पूरे 504 करोड़ के घोटाले में किसी एक सरकारी विभाग को हुआ सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी अब प्रदीप कुमार से पूरे वित्तीय नेटवर्क, निर्णय प्रक्रिया और धन के अंतिम लाभार्थियों के बारे में पूछताछ करेगी। जांच के दौरान उन्हें सरकारी गवाह बनाए जाने की संभावना पर भी चर्चा है, हालांकि इस पर सीबीआई की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सीबीआई के अनुसार, प्रदीप कुमार सदस्य सचिव रहते हुए बोर्ड के निवेश और फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े सभी निर्णय स्वयं देख रहे थे। जांच में सामने आया कि बोर्ड की राशि निर्धारित सीमा से कहीं अधिक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा में भेजी गई।
फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के नाम पर पहले एक अलग बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर किया गया, लेकिन विभाग उस खाते के खुलने से संबंधित कोई स्वीकृति या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा सका। जांच में यह भी सामने आया कि जिस खाते में सरकारी धन भेजा गया, उसमें कोई फिक्स्ड डिपॉजिट बनाई ही नहीं गई। इसके बजाय उसी खाते से फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन कर सरकारी राशि निकाल ली गई, जिससे हरियाणा सरकार को लगभग 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई का कहना है कि प्रदीप कुमार काफी समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद वे पूछताछ में शामिल नहीं हुए। इसके बाद एजेंसी ने उनकी लोकेशन ट्रेस कर मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक सीबीआई इस मामले में हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, तत्कालीन वित्त विभाग के अधिकारी आरके सिंह, हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव, कई बैंक अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर चुकी है। सीबीआई के अनुसार, हरियाणा सरकार के आठ विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपये फर्जी अथवा अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट, फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन और शेल कंपनियों के जरिये डायवर्ट किए गए। यह मामला राज्य सरकार के अनुरोध पर हरियाणा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से सीबीआई को सौंपा गया था। अब तक एजेंसी 17 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन लोकसेवक, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और क्रेस्ट से जुड़े समान प्रकृति के मामलों में भी चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

