सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों के लिए संशोधित पीएम उत्सर्जन मानकों को लागू करने की बढ़ाई समयसीमा

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सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों के लिए संशोधित पीएम उत्सर्जन मानकों को लागू करने की बढ़ाई समयसीमा


नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने उद्योगों के लिए पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन की अधिकतम सीमा को घटाकर 50 मिलीग्राम/एनएम³ कर दिया है। यह नया मानक पुराने 80 मिलीग्राम/एनएम³ के स्तर की जगह लेगा, जिसे आईआईटी कानपुर के अध्ययन और सीपीसीबी की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया है।

इसके साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम ) ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों के लिए संशोधित पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन मानकों को लागू करने की समयसीमा बढ़ा दी है। यह निर्णय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की सिफारिशों और उद्योग संगठनों की ओर से प्राप्त अभ्यावेदनों पर विचार के बाद लिया गया है।

सीएक्यूएम ने अपने निर्देश संख्या 98 में संशोधन करते हुए कहा है कि अब 50 एमजी/एनएम³ के नए पीएम उत्सर्जन मानक 1 अक्टूबर 2026 से सभी संबंधित उद्योगों पर लागू होंगे। पहले यह मानक 20 फरवरी 2026 के निर्देश के तहत लागू किए जाने थे।

आयोग ने स्पष्ट किया कि यह संशोधित मानक तकनीकी रूप से संभव और वायु गुणवत्ता सुधार के लिए आवश्यक है लेकिन उद्योगों को अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय दिया जा रहा है।

सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने इस दौरान उद्योगों को अनुपालन में सहायता देने के लिए कई कदम उठाए, जिनमें ऑनलाइन पोर्टल, एपीसीडी (एयर पॉलुशन कंट्रोल डिवाइस) की स्थापना और निगरानी शामिल है।

हालांकि उद्योग संगठनों ने उपकरणों की खरीद, स्थापना और परीक्षण में समय लगने जैसी व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला दिया।

इन सभी पहलुओं पर विचार के बाद आयोग ने कहा कि सीमित समय विस्तार से उद्योगों को अनुपालन में मदद मिलेगी, जबकि पर्यावरणीय लक्ष्य प्रभावित नहीं होंगे।

संशोधित निर्देश के अनुसार, अन्य सभी प्रावधान पहले की तरह यथावत रहेंगे और उद्योगों को तय समयसीमा के भीतर नए मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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