कैग-भाषिणी अनुवाद लॉन्च, अब सरकारी दस्तावेजों का कई भाषाओं में होगा अनुवाद

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कैग-भाषिणी अनुवाद लॉन्च, अब सरकारी दस्तावेजों का कई भाषाओं में होगा अनुवाद


नई दिल्ली, 30 सितंबर (हि.स.)। डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) कार्यालय ने बुधवार को सरकारी दस्तावेजों और लेखापरीक्षा रिपोर्टों का अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद करने के लिए ‘कैग-भाषिणी अनुवाद’ नाम का एआई शुरू किया। इसका मकसद सरकारी और लेखापरीक्षा से जुड़ी जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचाना है।

यह समाधान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन ने कैग के साथ मिलकर तैयार किया है। इसे नई दिल्ली स्थित कैग कार्यालय में 74वें हिंदी दिवस और हिंदी पखवाड़ा-2026 के समापन समारोह के दौरान लॉन्च किया गया।

कार्यक्रम में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के. संजय मूर्ति, उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ए.एम. बजाज, अतिरिक्त उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक डॉ. नीलोत्पल गोस्वामी, महानिदेशक अतूरवा सिन्हा सहित कैग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कैग-भाषिणी अनुवाद को खास तौर पर कैग की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह सरकारी और लेखापरीक्षा से जुड़े दस्तावेजों का अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद करने में मदद करेगा। इससे अनुवाद में एक जैसी शब्दावली बनाए रखने और अनुवाद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिलेगी।

इस व्यवस्था में दस्तावेजों की सुरक्षा, सीमित लोगों को पहुंच और आंकड़ों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। हालांकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होने वाले अनुवाद की मानव विशेषज्ञों द्वारा जांच और निगरानी भी जारी रहेगी।

डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने कहा कि भाषिणी अब केवल भाषा से जुड़े आंकड़ों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल कई तरह की सेवाओं में किया जा रहा है। उन्होंने भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए देश में अपनी भाषा तकनीक विकसित करने पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि भाषिणी फिलहाल 36 भारतीय लिखित भाषाओं, 23 भारतीय आवाज वाली भाषाओं और 35 विदेशी भाषाओं को समर्थन देता है। इसका इस्तेमाल किसानों को अलग-अलग भाषाओं में सलाह देने, आवाज के जरिए शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान करने जैसी सरकारी सेवाओं में भी किया जा रहा है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के. संजय मूर्ति ने कहा कि लेखापरीक्षा से जुड़ी रिपोर्ट और निष्कर्ष लोगों तक ऐसी भाषा में पहुंचने चाहिए, जिसे वे आसानी से समझ सकें। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में लेखापरीक्षा से जुड़ी जानकारी को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

अतिरिक्त उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (राजभाषा) नीलोत्पल गोस्वामी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संचार तकनीक के इस्तेमाल से भाषा की बाधा कम करने में मदद मिल सकती है। इससे सरकारी कामकाज में जानकारी को ज्यादा आसान, तेज और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

कैग और भाषिणी का सहयोग 14 से 29 सितंबर तक चले हिंदी पखवाड़ा-2026 में भी देखने को मिला। इस दौरान हिंदी से जुड़ी सामान्य प्रतियोगिताओं के साथ भाषिणी की मदद से तकनीक आधारित गतिविधियां और खेल भी आयोजित किए गए।

अधिकारियों और कर्मचारियों ने राजभाषा के इस्तेमाल, हिंदी में टिप्पणी और प्रारूप तैयार करने, अनुवाद और टाइपिंग जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। समापन समारोह में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाणपत्र दिए गए।

डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के अनुसार, भाषिणी 800 से ज्यादा सरकारी वेबसाइटों को सेवाएं दे रहा है। अब तक इसके जरिए 9 अरब से ज्यादा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। भाषिणी हर दिन 2.4 करोड़ से ज्यादा ऐसी प्रक्रियाओं को संभालता है।

कैग-भाषिणी अनुवाद के जरिए सरकारी संस्थानों के कामकाज में भाषा तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने और भारतीय भाषाओं में सरकारी जानकारी को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सौरव राय

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