कैबिनेट फैसला: ग्रेटर नोएडा में बनेगा देश का अत्याधुनिक प्रगति रोबोटिक्स पार्क
69.52 एकड़ में विकसित होगा रोबोटिक्स और एआई का नया केंद्र
पूर्ण विस्तार पर एक लाख से अधिक रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सालाना ₹2,000 करोड़ के मूल्यवर्धन का अनुमान
लखनऊ, 27 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश को आधुनिक तकनीक, औद्योगिक नवाचार और रोबोटिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में ग्रेटर नोएडा में ‘प्लेटफॉर्म फॉर रोबोटिक्स एंड एआई ग्रोथ थ्रू टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन’ (PRAGATI) रोबोटिक्स पार्क की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। लगभग 69.52 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाला यह पार्क रोबोटिक्स कंपनियों, तकनीकी स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों को एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य प्रदेश में स्वदेशी रोबोटिक्स विनिर्माण को प्रोत्साहित करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों के विकास को गति देना और रोबोटिक्स क्षेत्र में निवेश एवं अनुसंधान के लिए अनुकूल इकोसिस्टम तैयार करना है। परियोजना के पूर्ण विस्तार पर एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का वार्षिक सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) होने का अनुमान है।
पीपीपी मॉडल पर विकसित होगा पार्क का पहला जोन
प्रगति रोबोटिक्स पार्क को दो जोन में विकसित किया जाएगा। जोन-1 के लिए आठ एकड़ भूमि निर्धारित की गई है, जिसका विकास और संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर गठित विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) के माध्यम से किया जाएगा। इसमें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की इक्विटी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और चयनित औद्योगिक साझीदार की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत होगी। जोन-2 के लिए 61.52 एकड़ भूमि आरक्षित की जाएगी। इस क्षेत्र में निजी उद्यमों द्वारा निवेश कर औद्योगिक इकाइयों और संबंधित गतिविधियों का विकास किया जाएगा। इस जोन के विकास के लिए राज्य सरकार पर कोई पूंजीगत दायित्व नहीं होगा।
सरकार और प्राधिकरण करेंगे वित्तीय सहयोग
जोन-1 के विकास के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा 21.1 करोड़ रुपये का इक्विटी अंशदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से 30 वर्षों के लिए 126.2 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। आठ एकड़ भूमि के लीज प्रीमियम के संबंध में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार राज्य सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के माध्यम से प्राधिकरण को प्रतिपूर्ति की जाएगी। वहीं, जोन-2 में भूमि आवंटन विकास शुल्क से प्राप्त राजस्व का पांच प्रतिशत सेवा शुल्क एसपीवी को देय होगा, जिस पर लागू जीएसटी भी देय होगा।
औद्योगिक साझीदार का चयन गुणवत्ता-आधारित चयन प्रक्रिया (क्यूबीएस) के माध्यम से किया जाएगा। इसके बाद एसपीवी का पंजीकरण, भूमि आवंटन, पट्टा विलेख का निष्पादन और निर्माण संबंधी कार्यवाही पूरी की जाएगी। एसपीवी के पंजीकरण से 36 महीने के भीतर जोन-1 का वाणिज्यिक संचालन शुरू करने का लक्ष्य है। आवश्यकता पड़ने पर यह अवधि अधिकतम 48 महीने तक हो सकेगी। परियोजना की प्रगति की निगरानी समिति द्वारा समीक्षा की जाएगी।
एक ही परिसर में मिलेंगी रोबोटिक्स और एआई की अत्याधुनिक सुविधाएं
प्रगति रोबोटिक्स पार्क की विशेषता यह होगी कि यहां रोबोटिक्स परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र, रैपिड प्रोटोटाइपिंग, एआई कंप्यूट अवसंरचना, मोशन कैप्चर और डेटा प्रयोगशालाओं जैसी साझा सुविधाएं एक ही एकीकृत परिसर में उपलब्ध कराई जाएंगी। स्टार्टअप और उद्यमियों को किफायती दरों पर अत्याधुनिक परीक्षण, प्रोटोटाइप तैयार करने और जीपीयू आधारित कंप्यूटिंग सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इससे नए उत्पादों के विकास, तकनीकी प्रयोगों और नवाचार आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, रोबोटिक्स उत्पादों के वैश्विक मानकों के अनुरूप परीक्षण एवं सीई/यूएल प्रमाणन संबंधी क्षमताओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा, आयात पर निर्भरता घटाने की पहल
रोबोटिक्स और एआई आधुनिक उद्योगों, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश में रोबोटिक्स पार्क की स्थापना से स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण क्षमता विकसित करने के अवसर बढ़ेंगे। इससे आयात पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू कंपनियों को वैश्विक बाजार के अनुरूप उत्पाद विकसित करने में मदद मिल सकती है। परियोजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं और कुशल तकनीकी कार्यबल को रोबोटिक्स, एआई, प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास के अवसर उपलब्ध होंगे। पार्क से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों, स्टार्टअप और संबंधित मूल्य श्रृंखला के विस्तार के साथ लगभग एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। पूर्ण संचालन पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये के वार्षिक सकल मूल्यवर्धन की संभावना के साथ प्रगति रोबोटिक्स पार्क उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और नवाचार को गति देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना बन सकता है।
कैबिनेट फैसला
₹104.28 करोड़ से बनेगा यूपी का साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर
आईआईटी कानपुर का C3iHub करेगा स्थापना और संचालन
सरकारी डिजिटल ढांचे की 24×7 निगरानी से साइबर हमलों और डेटा चोरी पर लगेगी प्रभावी रोक
लखनऊ, 27 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर (UP-CSOC) की स्थापना आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब C3iHub के माध्यम से कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस परियोजना पर जीएसटी सहित कुल 104.28 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से प्रदेश के स्टेट डेटा सेंटर, उत्तर प्रदेश स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (UPSWAN), सरकारी एप्लिकेशन और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल परिसंपत्तियों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। साइबर सुरक्षा से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि, हमले या डेटा सेंधमारी की स्थिति में त्वरित कार्रवाई और प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने में यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आईआईटी कानपुर के C3iHub को मिलेगी जिम्मेदारी
UP-CSOC की स्थापना के लिए आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब C3iHub को कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नामित किया जाना प्रस्तावित है। एजेंसी द्वारा केंद्र की स्थापना के साथ तीन वर्षों तक संचालन, निगरानी, साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर प्रतिक्रिया, रखरखाव और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था से प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों के डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को एकीकृत और व्यवस्थित स्वरूप देने में मदद मिलेगी। साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की निगरानी और उनका विश्लेषण केंद्रीय स्तर पर किया जा सकेगा, जिससे समय रहते खतरे की पहचान और आवश्यक कार्रवाई संभव होगी।
आधुनिक तकनीक से होगी साइबर खतरों की पहचान
UP-CSOC में नेक्स्ट जनरेशन फायरवॉल (एनजीएफडब्ल्यू), सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन एंड इवेंट मैनेजमेंट (एसआईईएम), सिक्योरिटी ऑर्केस्ट्रेशन, ऑटोमेशन एंड रिस्पॉन्स (एसओएआर), यूजर एंड एंटिटी बिहेवियर एनालिटिक्स (यूईबीए), नेटवर्क डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स (एनडीआर), वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (डब्ल्यूएएफ), एपीआई सिक्योरिटी, एंटी-डीडीओस, एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (एपीटी) और डीएनएस सिक्योरिटी जैसी आधुनिक तकनीकें स्थापित की जाएंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), थ्रेट इंटेलिजेंस और एडवांस्ड एनालिटिक्स के उपयोग से संभावित साइबर हमलों की समयपूर्व पहचान करने और उनके प्रभाव को कम करने में सहायता मिलेगी। इससे रैनसमवेयर, डेटा चोरी, अनधिकृत पहुंच और अन्य साइबर खतरों के विरुद्ध सरकारी डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा मजबूत होगी।
24 घंटे तैनात रहेंगे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ
केंद्र के संचालन के लिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी, जो चौबीसों घंटे खतरे की निगरानी, साइबर घटनाओं पर प्रतिक्रिया और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएंगे। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) और नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत वल्नरेबिलिटी असेसमेंट, थ्रेट हंटिंग, साइबर ड्रिल, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे सरकारी विभागों की साइबर सुरक्षा संबंधी तैयारियों को बेहतर बनाने और संभावित खतरों से निपटने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट से होगी व्यवस्था की समीक्षा
UP-CSOC की सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित सेवा एवं सुरक्षा मानकों के अनुपालन की समीक्षा के लिए थर्ड-पार्टी सिक्योरिटी ऑडिटर की व्यवस्था की जाएगी। इसके माध्यम से प्रत्येक तिमाही में सुरक्षा ऑडिट और अनुपालन की समीक्षा कराई जाएगी। इससे केंद्र की कार्यप्रणाली, सुरक्षा प्रोटोकॉल और निर्धारित मानकों के पालन का स्वतंत्र मूल्यांकन संभव होगा।

