लोकतंत्र की सफलता जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर निर्भर : मुख्यमंत्री
गयाजी, 11 जुलाई (हि.स.)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सक्षम विधायक और सशक्त विधानसभा ही समृद्ध बिहार की आधारशिला हैं। लोकतंत्र की सफलता जनप्रतिनिधियों की क्षमता, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है। विधायकों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें अपने संवैधानिक दायित्वों और जनहित से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से निभाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री शनिवार को गयाजी स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) में बिहार विधानसभा के सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता ने विधायकों को विश्वास और अपेक्षाओं के साथ विधानसभा भेजा है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं, जनता की आकांक्षाओं और विकास से जुड़े मुद्दों को पूरी तैयारी, तथ्यात्मक जानकारी और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सदन में उठाएं।
सम्राट चौधरी ने विधायकों से विधानसभा की कार्यप्रणाली, नियमों और संसदीय परंपराओं का गंभीरता से अध्ययन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं और अधिक प्रभावी एवं मजबूत बनेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की रचनात्मक भूमिका जरूरी है। स्वस्थ संवाद, सार्थक विमर्श और जनहित को सर्वोपरि रखने की भावना से ही सदन की गरिमा बढ़ती है और राज्य के विकास को गति मिलती है।
मुख्यमंत्री ने विधायकों से विधानसभा सत्र के दौरान सदन में अधिक समय देने और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को अपनी भूमिका पूरी जिम्मेदारी के साथ निभानी होगी।
सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक विधायक और जनप्रतिनिधि का भी कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा की कार्यप्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सहित नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से विधायी कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से बस स्टैंड, टाउनशिप और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं को गति दे रही है, जिससे बिहार के विकास को नई दिशा मिलेगी।
सम्राट चौधरी ने राज्य सरकार के 'सहयोग' कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए विधायकों से इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से आम लोगों को समय पर न्याय और बेहतर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
शिक्षा क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 जुलाई से बिहार के विभिन्न प्रखंडों में 213 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम उच्च शिक्षा के विस्तार और ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि गयाजी में आयोजित यह दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम नवनिर्वाचित विधायकों को संसदीय परंपराओं, विधायी दायित्वों और जनसेवा की भावना को और मजबूत करने में मार्गदर्शन देगा। उन्होंने कहा कि सक्षम विधायक और सशक्त विधानसभा के माध्यम से ही समृद्ध बिहार के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

