प्रख्यात नेत्र चिकित्सक पद्मश्री बीके जैन पंचतत्व में विलीन
चित्रकूट (उत्तर प्रदेश), 01 मार्च (हि.स.)। देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से अलंकृत प्रख्यात नेत्र चिकित्सक और रायपुर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के अध्यक्ष डॉ. बीके जैन (बुधेंद्र कुमार जैन) आज दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गए। वह श्री सदगुरु सेवा संघ चित्रकूट के निदेशक, ट्रस्टी भी थे।
मुखाग्नि उनके पुत्र डॉ. इलेश जैन ने दी। इस मौके पर सर्वोदय कार्यकर्ता अभिमन्यु भाई, रामभद्राचार्य के शिष्य जय मिश्रा, डॉ. जोगन पुत्रा, डॉ. वी अग्रवाल, डॉ. आरके गौड, समाजसेवी हीरा सिंह, ग्रामोदय विश्वविद्यालय के मुन्ना सिंह, भागवताचायार्य नीलेश दीक्षित, दीन दयाल शोध संस्थान के पदाधिकारी बसंत पंडित मौजूद रहे। इस मौके पर हजारों लोग मौजूद रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मई, 2025 में उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया था।
एक बयान में श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट ने अत्यंत दुख और भारी हृदय के साथ पद्मश्री डॉ. वीके जैन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सदगुरु सेवा संघ ने बयान में कहा कि वे प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञ, संवेदनशील समाज सुधारक और हमारे आदरणीय ट्रस्टी और निदेशक थे। पांच दशकों से अधिक समय तक चित्रकूट तपोभूमि पर उनकी निष्ठापूर्ण और तपस्वी सेवाओं ने लाखों लोगों को दृष्टि ही नहीं, जीवन जीने की नई आशा और आत्मविश्वास प्रदान किया। उनके अथक परिश्रम और दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत के नेत्र चिकित्सा संस्थानों में से एक की स्थापना और निरंतर विकास में अमूल्य योगदान दिया। उनकी करुणा, सेवाभाव और मानवीय संवेदनाएं सदैव हमारे लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को शाश्वत शांति प्रदान करें।
परिजनों ने बताया कि डॉ. जैन पिछले कई महीनों से अस्वस्थ थे। उनका इलाज मुंबई में चल रहा था। चिकित्सकों के अनुसार वेंटिलेटर से हटाए जाने के बाद शुक्रवार शाम 4:24 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
डॉ. जैन का जन्म 05 दिसंबर, 1948 को महाराष्ट्र में हुआ था। वर्ष 1970 में वे चित्रकूट आए और स्वामी रणछोड़दास महाराज के सानिध्य में रहकर नेत्र चिकित्सा सेवा को पूरी तरह समर्पित हो गए। उनका पार्थिव शरीर आज पंचतत्व में विलीन हो गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

