सोमनाथ मंदिर के 1000 साल पूरे, भाजपा ने बताया भारत की सनातन आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक
नई दिल्ली, 05 जनवरी (हि.स.)। सोमनाथ मंदिर को आज से एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने विध्वंस किया था। आज मंदिर दोबारा अपनी शोभा के साथ आस्था का केन्द्र बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने सोमनाथ मंदिर को भारत की सनातन आध्यात्मिक शक्ति का ज्योति प्रतीक बताया है।
भाजपा मुख्यालय में सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज का दिन यह स्मरण कराता है कि जब इतिहास में बर्बर आक्रमणों के द्वारा भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक शक्ति को ध्वस्त कर अंधकार में ढकेलने का प्रयास होता है, तब तब भारत से एक ज्योति शक्ति पूंजी के रूप में प्रकट होकर विश्व को नया प्रकाश देती है।
उन्होंने कहा कि हर देश के इतिहास में कई महत्वपूर्ण मोड़ आते हैं और कई ऐसी तारीखें आती हैं, जो अविस्मरणीय, परंतु ऐसे असहनीय आघात दिए हुए होती हैं, जिन्हें याद रखना इसलिए आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में उसकी पुनरावृत्ति की संभावना न रहे। उन्होंने कहा कि सोमनाथ एक ऐसा शिवलिंग है, जिसे देखने मात्र से पापों का नाश होता है, पुण्यों की प्राप्ति होती है, मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं और स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त होता है। सिर्फ एक आस्था का विषय नहीं है।
त्रिवेदी ने कहा कि जब सोमनाथ की पुनर्स्थापना हो रही थी, तो 11 मई, 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने कहा था कि सोमनाथ की पूर्ण प्रतिष्ठा मात्र उस दिन नहीं होगी, जिस दिन भव्य रूप में वह मूर्ति और मंदिर प्रतिस्थापित होगा, बल्कि उस दिन पूर्ण मानी जाएगी, जिस दिन भारत की समृद्धि का शिखर भी उसी प्रकार उठता हुआ दिखाई पड़ेगा, जिस समृद्धि से आकर्षित होकर यहां क्रूर और बर्बर आतंकी आक्रमण किया गया था।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज 1 हजार वर्ष के बाद अगर हम देखें, तो 1951 में जवाहरलाल नेहरू जी के पुरजोर विरोध के बावजूद, प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की उपस्थिति में यह स्वप्न साकार हुआ था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत समृद्धि की तरफ बढ़ रहा है और आज वह स्वप्न पूर्णता की ओर है। सोमनाथ के संकल्प का विचार आज चरितार्थ होता नजर आ रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

