लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार, लेकिन यह कानून के दायरे में होना चाहिएः भाजपा
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार कानून और निर्धारित मर्यादाओं के दायरे में होना चाहिए।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें अराजक नेता बताया। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल निर्धारित नियमों और सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए।
भाटिया ने कहा कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल होते हैं और वहां भी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया जाता है। इसके लिए आवश्यक अनुमति लेना भी जरूरी होता है। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी के उस कथित ऐलान पर सवाल उठाया, जिसमें 10 एवं 11 तारीख को प्रदर्शन करते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही गई थी।
भाजपा नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्याय का मंदिर है और वहां भीड़तंत्र के लिए कोई जगह नहीं हो सकती। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने के अधिकार के साथ-साथ कानून, न्यायपालिका और संस्थागत प्रक्रियाओं का सम्मान करना भी जरूरी है।
भाटिया ने धर्मांतरण और अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य मानने के सवाल पर निर्णय दिया गया था।
भाटिया के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति का दर्जा उन्हीं व्यक्तियों को मिल सकता है, जो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानते हैं। इन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति अनुसूचित जाति का दर्जा और उससे जुड़े लाभ प्राप्त करने का दावा नहीं कर सकते। भाजपा नेता ने इस फैसले को अनुसूचित जाति के दर्जे और उससे संबंधित कानूनी प्रावधानों की व्याख्या के लिहाज से अहम बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सौरव राय

