अस्पतालों की फॉर्मेसी में दवाओं की कीमतों में हो रहा बड़ा खेल 

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अस्पताल फार्मेसियों की जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े, ₹74.09 में खरीदा इंजेक्शन, पैक पर एमआरपी ₹4,980.94 

यूपीएफएसडीए द्वारा अस्पतालों की 214 फार्मेसियों की जांच के बाद दवाओं की खरीद और बिक्री कीमतों में मिला बड़ा अंतर 

130 दवाओं में 36 की एमआरपी खरीद कीमत से 10 गुने से भी अधिक, कुछ मामलों में अंतर 67 गुने तक

आईसीयू और गंभीर संक्रमण में इस्तेमाल होने वाली कई इंजेक्टेबल दवाओं में भी खरीद दर और एमआरपी के बीच बड़ा अंतर

Polymyxin-B, Colistin, Tigecycline, Terlipressin और Caspofungin जैसी कई दवाएं सूची में


लखनऊ, 4 अक्टूबर। अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की खरीद दर और पैक पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ड्रग सेफ्टी के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (यूपीएफएसडीए) द्वारा मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की फार्मेसियों का निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान, इन फार्मेसियों में उपलब्ध दवाओं की खरीद दर और एमआरपी का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। प्रदेशभर की 214 अस्पताल फार्मेसियों से जुटाए गए आंकड़ों में 130 दवाओं का विश्लेषण किया गया, जिनमें 36 दवाएं ऐसी हैं, जिनकी एमआरपी फार्मेसी की खरीद कीमत से 10 गुने से भी कहीं अधिक है। कुछ दवाओं में यह अंतर करीब 67 गुने तक दर्ज किया गया। खास बात यह है कि इनमें गंभीर संक्रमण, आईसीयू और अन्य जटिल चिकित्सकीय स्थितियों में इस्तेमाल होने वाली कई इंजेक्टेबल दवाएं भी शामिल हैं।

Polymyxin-B: ₹74.09 में खरीद, पैक पर MRP ₹4,980.94

अध्ययन में गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण में इस्तेमाल होने वाले Polymyxin-B Injection (GUFIPOL 500,000 Unit) की फार्मेसी खरीद दर सिर्फ ₹74.09 दर्ज की गई, जबकि पैक पर एमआरपी ₹4,980.94 थी। यानी एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 67 गुना थी। इसी दवा के GUFIPOL 5 Lac की खरीद कीमत ₹90 और एमआरपी ₹4,528.10 दर्ज की गई। इस मामले में एमआरपी खरीद दर के मुकाबले करीब 50 गुना अधिक पाई गई। इस तरह एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड/पैक में भी खरीद कीमत और एमआरपी के बीच उल्लेखनीय अंतर सामने आया है।

Terlipressin: ₹56 की खरीद पर एमआरपी ₹3,050

लिवर की गंभीर बीमारी से जुड़ी कुछ चिकित्सकीय स्थितियों में इस्तेमाल होने वाले Terlipressin Injection (Terlitech 10 ml) की खरीद कीमत अध्ययन में ₹56 दर्ज की गई, जबकि इसकी एमआरपी ₹3,050 थी। इस तरह एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 54 गुना अधिक रही। इसी दवा के एक अन्य ब्रांड TERONIM 10 ML की खरीद कीमत ₹56 और एमआरपी ₹2,600 दर्ज की गई। यहां खरीद कीमत और एमआरपी के बीच करीब 46 गुने का अंतर पाया गया।

Colistin और Tigecycline में करीब 46 गुने का अंतर

दवा-प्रतिरोधी गंभीर संक्रमणों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले शक्तिशाली एंटीबायोटिक भी अध्ययन में शामिल हैं। Colistimethate Sodium 4.5 MIU की खरीद कीमत ₹210 दर्ज हुई, जबकि इसकी एमआरपी ₹9,702.31 थी। यानी एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 46 गुना थी। इसी तरह Tigecycline Injection 50 mg की खरीद कीमत ₹154.54 के मुकाबले एमआरपी ₹7,110.47 दर्ज हुई। यहां भी एमआरपी और खरीद दर के बीच करीब 46 गुने का अंतर सामने आया। जांच में सामने आए ये आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये दवाएं सामान्य ओटीसी दवाओं की श्रेणी की नहीं, बल्कि गंभीर और जटिल संक्रमणों के इलाज में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं हैं।

Meropenem के अलग-अलग ब्रांड में 5.31 से 9.98 गुने तक अंतर

अध्ययन में एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड के आंकड़ों की भी तुलना की गई। गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले Meropenem 1 gm के विभिन्न ब्रांड में खरीद कीमत और एमआरपी का अनुपात एक जैसा नहीं मिला। इसके अलग-अलग ब्रांड में एमआरपी फार्मेसी की खरीद कीमत के मुकाबले करीब 5.31 गुने से 9.98 गुने तक दर्ज की गई। यानी समान स्ट्रेंथ वाली दवा में भी ब्रांड बदलने के साथ खरीद दर और एमआरपी के बीच अंतर बदल रहा है।

Caspofungin: ₹800 की खरीद, एमआरपी ₹21,230

गंभीर फंगल संक्रमण के उपचार में इस्तेमाल होने वाली Caspofungin 70 mg के अलग-अलग ब्रांड में भी बड़ा अंतर दर्ज किया गया। एक ब्रांड की खरीद कीमत ₹800 थी, जबकि उसकी एमआरपी ₹21,230 दर्ज की गई। यानी एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 26.5 गुना थी। इसी दवा के दूसरे ब्रांड की खरीद कीमत ₹897.75 और एमआरपी ₹19,892 दर्ज हुई। इस मामले में एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 22 गुना रही। ये आंकड़े बताते हैं कि समान स्ट्रेंथ वाली दवा के अलग-अलग ब्रांड में भी खरीद दर और एमआरपी का अनुपात एक जैसा नहीं है।

कैंसर की दवा में ₹62 हजार से अधिक का अंतर

महंगी कैंसर और जीवनरक्षक दवाओं में खरीद कीमत और एमआरपी का अनुपात कुछ अन्य इंजेक्शन की तुलना में कम होने के बावजूद प्रति यूनिट रुपये में अंतर काफी बड़ा दर्ज किया गया। उदाहरण के तौर पर Bevacizumab 400 mg की खरीद कीमत ₹7,541.10 थी, जबकि इसकी एमआरपी ₹69,995 दर्ज की गई। यानी खरीद कीमत और एमआरपी के बीच ₹62,453.90 का अंतर सामने आया। Inonza 1 mg की खरीद कीमत ₹2,07,504 है, जबकि एमआरपी ₹3,02,610। वहीं, Simulect 200mg inj की खरीद कीमत ₹72,700.95 और एमआरपी ₹95,420 है। इसके अलावा Keytruda 100 mg inj की खरीद कीमत ₹1,81,860 और एमआरपी ₹2,16,500 है। 

मेडिकल डिवाइस में भी बड़ा मूल्य अंतर

जांच केवल दवाओं तक सीमित नहीं रहा। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल डिवाइसेज की खरीद कीमत और एमआरपी के आंकड़े भी देखे गए। एक 3-way stop cock की खरीद कीमत ₹6.40 दर्ज की गई, जबकि इसकी एमआरपी ₹163 थी। इस तरह एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 25 गुना रही। एक अन्य मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत ₹20.95 थी, जबकि उसकी एमआरपी ₹500 दर्ज की गई। यहां भी खरीद कीमत और एमआरपी के बीच करीब 24 गुने का अंतर सामने आया।

ऊंची एमआरपी के पीछे ऊंचे मार्जिन का गणित

अस्पताल फार्मेसियों से जुटाए गए आंकड़ों में खरीद दर और एमआरपी के बीच सामने आया बड़ा अंतर दवाओं की प्राइसिंग और ट्रेड मार्जिन के मॉडल पर भी सवाल खड़े करता है। विभागीय विश्लेषण में इस पहलू पर भी गौर किया जा रहा है कि अस्पतालों को बेहद कम दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के बावजूद पैक पर एमआरपी कई गुना अधिक क्यों दर्ज है। आशंका है कि अधिक ट्रेड मार्जिन और डिस्काउंट की गुंजाइश बनाए रखने के लिए कुछ मामलों में एमआरपी वास्तविक खरीद दर के मुकाबले काफी ऊंची रखी जाती है। ऐसी स्थिति में अस्पताल मरीज को एमआरपी पर बड़ी छूट दिखा सकता है, जबकि उसकी वास्तविक खरीद कीमत उससे बहुत कम होती है। इस व्यवस्था में निर्माता और अस्पताल दोनों के लिए मार्जिन की पर्याप्त गुंजाइश है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ मरीज तक कितना पहुंच रहा है, यह अहम सवाल है।

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