बस्तर में पड़े थे भगवान श्रीराम के चरण, इसकी पवित्रता बनाए रखना सभी का दायित्व : राष्ट्रपति मुर्मु

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बस्तर में पड़े थे भगवान श्रीराम के चरण, इसकी पवित्रता बनाए रखना सभी का दायित्व : राष्ट्रपति मुर्मु


जगदलपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भगवान श्रीराम के चरण बस्तर के अंचल में पड़े थे, जिससे इसकी पवित्रता और सांस्कृतिक महिमा और भी विशेष हो जाती है। इस प्राकृतिक संपदा, समृद्ध परंपराओं और गौरवशाली विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखना हम सभी का साझा दायित्व है।

राष्ट्रपति मुर्मु शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर दशहरा 2026 के तहत जगदलपुर के लालबाग मैदान में आमसभा को संबोधित

कर रही थीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी मान्यताएं और माता शबरी से उनकी भेंट की परंपरा इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। उन्होंने बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं और जनजातीय समाज की एकजुटता की सराहना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

राष्ट्रपति ने सभी को बस्तर दशहरा की शुभकामनाएं दीं और मां दंतेश्वरी सहित क्षेत्र के देवी-देवताओं को नमन किया। उन्होंने कहा कि इस पावन अवसर पर मां दंतेश्वरी के दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बस्तर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि दंडकारण्य का वर्णन वाल्मीकि रामायण में मिलता है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि की विरासत को सुरक्षित रखना सभी का दायित्व है।

उन्होंने बस्तर दशहरा में विभिन्न समाजों की भागीदारी को विशेष बताते हुए कहा कि यहां की परंपराएं लोगों को आपस में जोड़ती हैं। मांझियों से मुरिया दरबार की व्यवस्था के बारे में जानकारी मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे जनता से जुड़ी परंपरा बताया, जो लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करती है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से नक्सली आतंक से पीड़ित लोगों को राहत मिली है और अब वे आगे बढ़ने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में आदिवासी खिलाड़ियों की भागीदारी की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि यहां के खिलाड़ी भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे और ओलंपिक में भी देश के लिए पदक जीत सकते हैं। उन्होंने जनजातीय समाज में प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा का उल्लेख करते हुए जंगल, पहाड़ और पेड़-पौधों के संरक्षण पर भी जोर दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि पेड़-पौधे जीवन के लिए जरूरी हैं, उनसे ऑक्सीजन और भोजन मिलता है तथा पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने लोगों से जंगलों को सुरक्षित रखने और खेतों सहित बंजर जमीन पर भी पौधे लगाने की अपील की, ताकि आने वाली पीढ़ियों को हरा-भरा वातावरण मिल सके। बस्तर दशहरा की आगामी रस्मों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि कुटुम्ब जात्रा के बाद 27 अक्टूबर को मावली देवी की डोली विदाई का कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक परंपराएं समावेशी हैं और इनमें सभी समाजों की सहभागिता दिखाई देती है। इन परंपराओं से आपसी सम्मान, एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी की सीख मिलती है।

राष्ट्रपति मुर्मु इससे पूर्व आज 23 अक्टूबर 2026 को बस्तर दशहरा के सबसे महत्वपूर्ण, पारंपरिक और ऐतिहासिक 'मुरिया दरबार' रस्म की भी साक्षी बनीं। इस ऐतिहासिक रस्म में शामिल होने वाली वह देश की पहली राष्ट्रपति हैं। जगदलपुर पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। अपने संबोधन में उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर का यह क्षेत्र अब नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त होकर शांति, समृद्धि और तेज विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।

बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति का आगमन गौरव की बात : मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति और राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा करीब 75 दिनों तक चलने वाला विशिष्ट पर्व है। इस वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आगमन और बस्तर का माओवाद से मुक्त होना क्षेत्र के लिए विशेष खुशी की बात है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद से मुक्ति, सड़क-रेल संपर्क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को बस्तर के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा से लोगों को आवागमन की सुविधा मिल रही है। रायपुर से रावघाट तक रेल सेवा शुरू हो चुकी है, जबकि रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन का काम जारी है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल बनाया गया है और गीदम में मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। सरकार वनोपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में भी काम कर रही है।_______________

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

Livevns.news Desk
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