वनवासी कल्याण आश्रम का 43वां वार्षिकोत्सव संपन्न, जनजाति समाज के सशक्तिकरण पर जोर
कोलकाता, 22 फरवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के 43वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर कोलकाता के कला मंदिर में रविवार काे भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आश्रम से संबद्ध पूर्वांचल कल्याण आश्रम ने जनजाति (वनवासी) समाज के साथ मिलकर विशेष समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनजाति समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सांस्कृतिक जागरण के माध्यम से सशक्त कर उन्हें राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन एवं प्रख्यात उद्योगपति प्रमोद गुप्ता ने की। मुख्य अतिथि के रूप में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय कोषाध्यक्ष और प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बंगाल की राजनीति में अनुशासन की आवश्यकता है। अनुशासन से ही समाज का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम जनजाति समाज को सशक्त बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक, लेखक एवं अभिनेता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि सभ्यता का विकास वन से नगर की ओर हुआ है। रामायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने वनांचलों की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि वन क्षेत्रों में भी ज्ञान और संस्कृति का गहरा आधार मौजूद है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रमोद गुप्ता ने पूर्वांचल कल्याण आश्रम द्वारा वनवासी समाज के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। कहा कि वनवासी समुदाय को अक्सर मुख्यधारा से अलग समझा जाता है, जबकि वास्तव में यह समुदाय सर्वगुण संपन्न और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए वीर हनुमान का उदाहरण दिया और कहा कि वन में रहने वाले समुदाय धर्म, सत्य और मर्यादा के मार्ग पर चलते हैं।
उन्होंने कहा कि वनवासी समाज प्रकृति के संरक्षण का जीवंत उदाहरण है और उनके उत्थान के लिए कार्य करना एक श्रेष्ठ सामाजिक एवं आध्यात्मिक दायित्व है। धर्म की रक्षा के लिए धर्म का उपयोग सर्वोत्तम कार्य है और वनवासी समाज की सेवा भी उसी का एक स्वरूप है। उन्होंने भगवान शंकर का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण और सामाजिक संतुलन का संदेश आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ख्यातनाम नरेश बाबा श्याम की कथा पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति ‘हारे का सहारा – बर्बरीक श्याम हमारा’ का मंचन किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का निर्देशन सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था ‘मधुरा’ की शुभ्रा अग्रवाल ने किया।
समारोह में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, चिकित्सक तथा बड़ी संख्या में जनजाति समाज के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रनिर्माण में जनजाति समाज की भूमिका को और सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुआ।
उल्लेखनीय है कि, पूर्वांचल कल्याण आश्रम की कोलकाता और हावड़ा महानगर शाखाएं वर्ष 1952 से निरंतर जनजातीय समाज के उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। 73 वर्षों की इस सतत यात्रा (1952–2025) में संगठन ने शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कई पहलें की हैं।---------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

