(अपडेट) संतों ने बैठक कर श्रीरामजन्मभूमि में सामने आये चोरी के प्रकरण को लेकर देशभर में फैले दुष्प्रचार का पुरजोर प्रतिवाद किया
अयोध्या, 23 जुलाई (हि.स.)। श्री राम सत्संग भवन धर्म मंडपम, मणिराम दास छावनी में सन्त मण्डल अयोध्या धाम की संगोष्ठी गुरुवार को संपन्न हुई। संगोष्ठी के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि मंच संचालन - महन्त श्री रामानन्द दास जी महाराज ने किया।
संचालन करते हुए महन्त डॉ रामानन्द दास जी ने कहा कि योगी जी ने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बना दिया। उनके कारण पूरे देश में अयोध्या का सम्मान बढ़ा है। प्रत्येक समाज में अच्छे-बुर लोग होते हैं। श्रीरामजन्मभूमि के एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रसंग का दुष्प्रचार करके राजनैतिक लोगों ने देशभर भर में भ्रम फैला दिया है। परन्तु गोस्वामी जी ने कहा है कि संत हंस गुन गहहिं पय, परिहरि बारि बिकार। सन्त जन नीर-क्षीर विवेक से जल का त्याग करके दुग्ध ग्रहण करते हैं। आज विरोधी तत्वों को अयोध्या और देश का विकास अच्छा नहीं लग रहा है। वे भांति-भांति के उपद्रव करते हैं। महापुरुष ऐसी शक्तियों को सफल नहीं होने देंगे। आगामी चुनाव में भी वे इन षडयन्त्रों को विफल करेंगे।
प्रस्तावना : अधिकारी श्री राजकुमारदसमी जी महाराज
अयोध्या धाम सप्तपुरियों में प्रथम मोक्षदा पुरी है। श्री अयोध्या धाम सात मोक्षदा पुरियों में मुख्यतम है। यह केवल आध्यात्मिक ही नहीं अपितु मानवीय आदशों का भी केन्द्र है। सन्त के इसके अनादिसिद्ध प्रक्ता हैं। अयोध्या के पूज्य सन्त ही अयोध्या के गौरव के प्रमाण हैं। हमें अपनी पूर्वाचार्य-परम्परा के अनुरूप अपने इष्ट-धाम के गौरव बोध के लिए सतत सजग रहना ही चाहिये। यह कितना आश्चर्यजनक एवं त्रासद है कि जिनकी व्यवस्था में चोरी हुई, जो इस दुर्घटना के पीड़ित हैं, उन्हें ही अपराधी बनाने का खेल चल पड़ा।
यह वास्तव में श्रीराममन्दिर से संगठित और एकात्म हुए हिन्दू समाज की आस्था को छलने का दुष्चक्र था, जिसमें विपक्षियों को काफी सफलता भी प्राप्त हुई। क्योंकि इस दुष्प्रचार को रोकने में हम-आप वैसे सक्रिय नहीं हो सके, जैसे विरोधी हुए। अभद्र टिप्पणियां, व्यक्तिगत लांछन तथा निराधार आरोपों के बवंडर ने सहज श्रद्धा को तार-तार करने का काम किया। हमें समझना होगा कि यह आन्दोलन चोरी के विरुद्ध नहीं, बल्कि श्रीराम मन्दिर से निर्मित हुई धार्मिक-सांस्कृतिक एकजुटता के विरुद्ध है। देश-दुनिया में बसे भारत-भाव के शत्रु हमारी धार्मिक-सांस्कृतिक अस्मिता को आहत करने के लिए संसद से सड़क तक सक्रिय हैं। वास्तव में यह हमारे सचेत होने का समय है। उन्होंने तुलसीदास जी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा- जाके प्रिय न राम वैदेही, तजिये ताहि कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेही।
अपने सम्बोधन में महन्त राघवेश दासजी महाराज ने कहा आज के दौर में कुछ षडयन्त्रकारी श्रीराम मन्दिर पर कुचक्र चला रहे हैं। वो लोग कभी कल्पना नहीं करते थे कि कभी श्रीराम मन्दिर का निर्माण होगा, लेकिन विहिप एवं आरएसएस के अथक प्रयत्न से सफल हुआ। चम्पत राय जी गलत नहीं हैं। हाँ, कुछ चूक हुई है पर हमें एकजुट होकर सब ठीक करना है।
रामायणी श्री रामकृष्ण दासजी ने कहा कि वास्तव में इस प्रकरण से अयोध्या की जो छवि बनी थी, उसमें कुछ विकृतियां आयी हैं। उनके परिहार के लिए हम सबको लगना होगा। 05 सदस्यीय सन्त-महान्त का धार्मिक समिति में चयन हुआ है। इससे सन्तों का नेतृत्व प्रमुख होगा और सब विघ्न बाधायें दूर होंगी।
रामायणी श्री कमला दासजी ने कहा कि काल सुभाव करम बरिआईं। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई॥ अच्छे लोग भी कभी काल के प्रभाव से चूक जाते हैं। पर महापुरुष उस चूक को सुधार देते हैं। ट्रस्ट में जिन पर अंगुलियां उठाई जा रही हैं वे निर्दोष हैं। दुष्प्रचार को दूर करने के लिए हमें संगठित होना होगा। सन्त समाज का नेतृत्व होने से सबका समाधान होगा।
महान्त वैदेही वल्लभशरण जी महाराज ने ट्रस्ट में सन्तचरणों के चयन पर सभी को साधुवाद देते हुए कहा कि जिन्होंने राम को कभी स्वीकार नहीं किया वे आज राम मन्दिर में महापुरुषों पर लांछन लगा रहे हैं। हमें ऐसे कालनेमियों को पहचानना चाहिए। हम सब सदैव रामभक्त सरकार के साथ रहे हैं और रहेंगे। विहिप और आरएसएस ने सभी सन्तों को एक मार्ग पर लाने का कार्य किया।
महान्त शशिकान्त दासजी महाराज आंजनेय सेवा संस्थान ने कहा कि श्रीराममन्दिर के विषय में जो अर्नंगल प्रलाप-चल रहा है वह पूर्णतया निराधार है। पंच परमेश्वर के माध्यम से इसे दूर करने का प्रयास चल रहा है। जिन्होने रामजन्मभूमि के लिए संघर्ष किये उन्हें ही आज कुचक्र चलाकर बदनाम किया जा रहा है। ऐसे दोषियों को किसी प्रकार से बख्शा नहीं जायेगा।
श्री रामदास जी महाराज - नाका हनुमानगढ़ी ने कहा कि संवाद से बड़े-बड़े विवाद हल हो जाते हैं। उन्होंने धार्मिक समिति के सभी चयनित पांचों महापुरुषों को हार्दिक बधाई दी। वे बोले कि आज अयोध्या के सभी धर्मावलम्बी समाज को अपने सम्बन्धों के आधार पर यहाँ के दूषित वातावरण को अच्छे विचारों द्वारा सुधार करने की आवश्यकता है।
डॉ भरतदासजी महाराज - रानोपाली ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि की मर्यादा को धूमिल करने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए हम सभी सन्त महापुरुषों को एकसाथ एक विचार का संवहन करने की आवश्यकता है। हमें सुनी-सुनाई बातों पर मनन करके ही अपने विचार व्यक्त करना चाहिए। हमें व्यक्ति के सम्बन्ध में जान-समझ कर ही वक्तव्य देना चाहिए। हमारी पूजा पद्धति श्रीरामानन्द पद्धति के अनुसार नये सदस्यों के आने से सतत चलती रहेगी।
महन्त गिरीशदासजी महाराज डांडिया मन्दिर ने कहा कि आज हमें श्रद्धालुओं, धर्मानुरागी व्यक्तियों में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। यह हम अयोध्यावासियों की नैतिक जिम्मेदारी है। चम्पतराय जी परम सन्त हैं। उनपर लगाये गये आरोप मिथ्या हैं। उन्होंने स्वयं की प्रेरणा से त्यागपत्र दिया। वे निःस्वार्थ श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में विगत पचासों वर्षों से लगे हुए हैं। उन्होंने जन भावनाओं के अनुकूल श्रीरामनला के आगमन के पथ को प्रशस्त करने में महती भूमिका निभाने का कार्य किया। सभी ट्रस्ट के पदाधिकारियों से निवेदन है कि रामलला दर्शन हेतु अयोध्यावासियों के आधार कार्ड को ही आधार बनाया जाय।
महन्त मनीष दास जी महाराज पत्थर मन्दिर ने अत्यन्त ओजस्वी वक्तव्य देते हुए कहा कि आज की बैठक का विचार बहुत पहले आ जाना चाहिए। श्री अयोध्या के सन्तों को विषम परिस्थितयों में वक्तव्य देने के बजाय मौन हो जाना ही बेहतर होगा। हमें अपने इष्टधाम के प्रति कदापि गलतबयानी नहीं करना चाहिए। सन्तोष दुबे जैसे लोग हमारे आराध्य के वैभव के संवाहक सन्तों पर गलतबयानी करते हैं यह ठीक नहीं है। अयोध्या में वही होगा जो अयोध्या का सन्त समाज चाहेगा। हम अपने आराध्य देव के लिए विहिप, आरएसएस एवं भाजपा की सकारात्मक भूमिका को कभी भुला नहीं सकते।
श्रीमहन्त जनार्दन दासजी - तुलसीदास छावनी ने कहा कि अयोध्या धाम श्रीरामजन्मभूमि की घटना को मीडिया ने अनावश्यक प्रचार-प्रसार से बढ़ा दिया। यह घटना उतनी बड़ी नहीं है। हम रामजी के अनुरागी है। राक्षस हर युग में रूप बदल कर साधुवेश में सन्तों की बदनामी कराते रहते हैं। हम धर्म की रक्षा के लिए रामजी की बरह कहीं भी रहें शस्त्र-शास्त्र का त्याग नहीं करते। ट्रस्ट के विधिवत संचालन में सन्त-महापुरुषों को गुण-दोषों के आधार पर रखना चाहिए। उत्सवों आदि के समय इनका विशेष सहयोग लेना चाहिए। हमारे सन्त समाज के महापुरुषों को धर्मसभा के माध्यम से अग्रणी भूमिका में रखना चाहिए।
महन्त परशुराम दास जी महाराज (हनुमत किला) बोले कि हमें सनातन और हिन्दुत्व को बदनाम करने वालों के प्रति सजग रहना चाहिए। तथाकथित धर्मगुरुओं के लिए एक समिति का गठन करके कार्यवाही करनी चाहिए। मीडिया पर बोलने के लिए हमे व्यक्ति का निर्धारण करना चाहिए।
जयराम दास जी महाराज-श्रीराम आश्रम ने कहा कि श्री रामानन्दीय परम्परा के अनुसार श्रीरामलला सरकार के सभी उत्सव मनाये जायेंगे। पूज्य सन्तों को ट्रस्ट ने धार्मिक समिति में लिया इसका स्वागत है।
महन्त श्री सत्यनारायणदास ने कहा कि स्वयं प्रभु भगवान् श्रीराम जी ने व्यक्ति रूप में जीवन जीने का तरीका सिखाया। दानवी प्रवृत्तियाँ अति उत्साह के साथ भगवान से प्रेरित होकर सद्वृत्ति की ओर अग्रसर हों। हम एक जैसी बात ही करें इससे सभी का कल्याण होगा।
निर्वाणी अनी अखाड़ा- महन्त गौरी शंकरदासजी ने कहा कि जिनका सनातन धर्म एवं मन्दिर से कभी सम्बन्ध नहीं था वे आज मन्दिर में चढ़ावा चोरी पर चर्चा कर रहे है। हम सभी उस महापुरुष के साथ हैं। जो अयोध्या को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है हमसब एकजुट होकर उसका पुरजोर विरोध करेंगें।
श्री रामानुज दासजी महाराज- सीताकान्त सदन ने कहा कि हमें अपनी मर्यादा में रहना चाहिए। हम गुरु-शिष्य परंपरा के संवाहक हैं, जो भी आदेश-निर्देश आचार्यों का हो, हमें उसका पालन करना चाहिए, मनमाना बयान नहीं देना चाहिए।
श्री सत्येन्द्र दासजी - श्री सीताराम निवासकुंज ने धर्म समिति के चयनित सदस्यों के प्रति का धन्यवाद ज्ञापित किया। अयोध्या में इस तरह की कुचर्चा बिल्कुल बर्दाश्त नही की जायेगी। आज मीडिया के माध्यमों से अयोध्या को बदनाम किया जा रहा है। सन्त मण्डल संगोष्ठी की बैठक पूर्व में ही होनी चाहिए थी।
महन्त संजय दास - अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि मन्दिर आन्दोलन में प्रारम्भकाल से ही श्री चम्पत राय के संघर्ष को आज तक भुलाया नहीं जा सकता। सन्तों की संगोष्ठी दो तीन माह में होती रहनी चाहिए। अनर्गल प्रलाप करने का वालों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
महन्त मुरलीदास जी महाराज-हनुमान गढ़ी ने मानस की चौपाई का सन्दर्भ देकर कहा कि जिनकर मन इन सन नहिं राता। ते जनु बंचित किए बिधाता। जिनको श्रीराम जी से प्रेम नहीं वे अभागे हैं। हमें हमारे जीवन में ही श्री रामजन्मभूमि मन्दिर दर्शन प्राप्त हुआ। इसके लिए संघ और विहिप के विचार परिवार को साधुवाद ।
श्री राजकुमार दासजी महाराज अधिकारी श्रीरामवल्लभा कुंज ने आह्वान करते हुए कहा कि हमें सनातन विरोधियों के बहकावे में नहीं जाना चाहिए। हमें सनातन के मान बिन्दुओं की सदैव रक्षा हेतु अग्रसर रहना चाहिए। हमने रामविरोधी विचारधारा का समय भी देखा है। संगठन ने समाज को जोड़ा है। मिथ्या आरोप से बचने की आवश्यकता है। जो चोर हैं वे सलाखों के पीछे हैं। हमे भ्रामक प्रचार से बचना चाहिए।
आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी श्री सिद्धपीठ श्री हनुमंत निवास ने कहा कि कहीं अग्निकांड होने पर यह पता किया जाता है कि अग्निशमन मन्त्र काम कर रहा था या नहीं। हिन्दू विरोधी शक्तियाँ सतत सक्रिय हैं। जब यह प्रवाद फैला तो तत्काल हम उसके प्रतिकार में सामने नहीं आ सके। जिससे मिथ्या प्रचार को बढ़ावा मिला। दुष्प्रचार से पूर्व हमें दृढता से प्रतिवाद करना था। उन्होंने हाल ही मे दिये अनुपम खेर के वक्तव्य का उल्लेख करते हुये कहा कि चोरी होने पर हम चोर पकड़े जाते हैं, मालिक को नहीं। परन्तु राममन्दिर में सेवादारों पर ही आरोप लागाने का नाटक हो रहा है। हमें छद्मवेश वाले धूत्तों से सावधान रहते हुए प्रवाद से बचना चाहिए। दान की वस्तु दाता की नहीं रह जाती, वह पानेवाले की हो जाती है। किन्तु दुष्प्रचार के कारण दाताओं का चित्त व्याकुल हो गया वे हिसाब माँगने का पाप करने लगे। असल में प्रतिकूलता केवल बल का नहीं, बल्कि विवेक का भी हरण करती है। सन्त श्रीरामजी की मर्यादाओं का अनुसरण करते हैं। धार्मिक समिति बनने से पूजा पद्धति में सुचारुता आयेगी। मीडिया को भाव और वेष का अन्तर नहीं पता है। वे बस कंटेंट खोजते हैं। एक नैरेटिव-वार चल रहा है। उसकी पहचान होनी आवश्यक है। हमे अयोध्या के स्वरूप की रक्षा हेतु सम-सामयिक विषयों पर मासिक बैठक कर विचार-विमर्श करना चाहिए। अयोध्या का एक स्वर होना होना चाहिए। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में अयोध्या का पक्ष रखते हुए हमें भ्रमित नहीं होना चाहिए।
महान्त कमलनयन दासजी महाराज श्री मणिरामदास छावनी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि जो हमेशा न्यायालय में रामजी विरोध में साक्ष्य देते थे, वही आज राममन्दिर में चोरी के प्रति चिन्तित हैं। चोरी नहीं हुई, विश्वासघात हुआ है। उन सभी को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। समय के साथ दूध का दूध और पानी का पानी होगा। समय आ गया है, हमें दुष्प्रचार पर ध्यान देकर बचना और बचाना है। विदेशों से दुष्प्रचार और सनतान की असुरक्षा हेतु फण्डिंग हो रही है। हमें संगठित होकर, विचार-विमर्श करके कुचक्र को विफल करन होगा।
श्रीरामजन्मभूमि में सामने आये चोरी के प्रकरण को लेकर देश भर में फैले दुष्प्रचार का पूज्य सन्तों ने पुरजोर प्रतिवाद किया। इस बारे में मीडिया/सोशल मीडिया में अनर्गल प्रलाप करने वाले वक्ताओं को आड़े हाथों लिया। संगोष्ठी में अयोध्या की एकता और सद्भाव का आह्वान करते हुए सन्तों ने मिथ्यारोप लगाने वालों को पहचानने और उनका बहिष्कार करने की बात भी कही। इस विशाल सन्त-सभा में सैकडौं सन्त-महान्त सम्मिलित हुए।
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हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय

