पीएम मोदी के जन्मदिन पर बक्सर के लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने लॉन्च की विकास यात्रा पर किताब
पटना, 16 सितम्बर (हि.स.)।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव निवासी प्रसिद्ध लेखक और वरिष्ठ पत्रकार मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने एक ऐसी पुस्तक को पाठकों के सामने रखा है, जो मौजूदा दौर की विकास यात्रा, नीतिगत बदलावों और भविष्य के भारत की परिकल्पना को दस्तावेजी रूप में सामने लाने का प्रयास करती है।
पुस्तक का नाम है- ‘मोदी युग का भारत’।
पुस्तक में विकास की उस तस्वीर को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिसमें एक ओर ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए देश को विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश दिखाई देती है, तो दूसरी ओर डिजिटल क्रांति की पहुंच देश के सुदूर गांवों तक होती नजर आती है। महिला सशक्तीकरण, बुनियादी ढांचे का विस्तार, बदलती अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका जैसे विषयों को भी पुस्तक में प्रमुखता दी गई है।
योजनाओं से आगे बढ़कर प्रभाव का विश्लेषण
‘मोदी युग का भारत’ की खासियत यह बताई गई है कि इसमें सरकारी योजनाओं की सूची प्रस्तुत करने के बजाय उनके प्रभाव और व्यापक संदर्भ को समझने का प्रयास किया गया है। लेखक मुरली ने यह देखने की कोशिश की है कि नीतियों और योजनाओं का असर देश के आम नागरिक, गांव, युवा, महिलाएं और आर्थिक गतिविधियों पर किस तरह पड़ा।
‘मेक इन इंडिया’ को पुस्तक में केवल एक नारे या औद्योगिक नीति के रूप में नहीं बल्कि भारत की उत्पादन क्षमता, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखने का प्रयास किया गया है। इसी तरह डिजिटल क्रांति को भी महज तकनीकी परिवर्तन नहीं माना गया है। लेखक के अनुसार, डिजिटल तकनीक ने सरकारी सेवाओं, बैंकिंग, भुगतान और सूचना तक आम लोगों की पहुंच को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष महिला सशक्तीकरण भी है। इसमें जमीनी स्तर पर महिलाओं की बदलती भूमिका और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली पहलों को रेखांकित किया गया है। लेखक का प्रयास यह दिखाना है कि विकास की कहानी तभी पूरी मानी जा सकती है, जब समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी उसमें सुनिश्चित हो।
पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय-2047 का भारत
‘मोदी युग का भारत’ का सबसे दिलचस्प और भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण हिस्सा वह है, जहां लेखक 2047 के भारत की तस्वीर सामने रखने का प्रयास करते हैं।
भारत की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर 2047 में देश कैसा होगा-यह सवाल आज की युवा पीढ़ी के लिए जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही नीति-निर्माताओं के लिए भी। पुस्तक में इसी भविष्य को वर्तमान नीतियों और फैसलों के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया गया है।
लेखक का मानना है कि आज लिए जा रहे नीतिगत फैसले आने वाले दशकों के भारत की दिशा तय करेंगे। इसी सोच के आधार पर पुस्तक पाठकों को यह समझने का अवसर देती है कि बुनियादी ढांचे, तकनीक, विनिर्माण, महिला भागीदारी, आर्थिक विकास, वैश्विक कूटनीति और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयास किस प्रकार भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ले जा सकते हैं।
‘आलोचना से बेहतर खासियत को आत्मसात करना’
मुरली मनोहर श्रीवास्तव का लेखन-दर्शन भी उनकी पुस्तकों की विषय-वस्तु को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की केवल आलोचना करने के बजाय उसकी अच्छी विशेषताओं को समझना और आत्मसात करना अधिक सार्थक है।
उनका मानना है कि देश के किसी भी स्तर पर हो रहे विकास और समाज के अनछुए पहलुओं पर काम करना लेखकीय प्राथमिकता होनी चाहिए। वे ऐसे विषय चुनना चाहते हैं, जिनमें आने वाली युवा पीढ़ी के लिए सीख, प्रेरणा और विचार की गुंजाइश हो।
बिहार से राष्ट्रीय विमर्श तक
डुमरांव जैसे ऐतिहासिक शहर से निकलकर राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर लगातार लेखन करना मुरली मनोहर श्रीवास्तव की रचनात्मक यात्रा का महत्वपूर्ण पक्ष है। उनकी पुस्तकों में बिहार की ऐतिहासिक और राजनीतिक विरासत से लेकर राष्ट्रीय स्तर के समकालीन मुद्दों तक का विस्तार दिखाई देता है।
पुस्तक का केंद्रीय विचार यही है कि किसी भी दौर को समझने के लिए केवल घटनाओं को दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। उन घटनाओं के पीछे की नीतियों, उनके प्रभाव और भविष्य पर पड़ने वाले संभावित असर को भी समझना जरूरी है।
युवाओं के लिए दस्तावेज बनने की कोशिश
श्रीवास्तव की दृष्टि में लेखन का अंतिम उद्देश्य केवल पुस्तक प्रकाशित करना नहीं, बल्कि पाठक को सोचने के लिए सामग्री देना है। ‘मोदी युग का भारत’ में वर्तमान की विकास यात्रा से लेकर 2047 के संभावित भारत तक की चर्चा इसी उद्देश्य को सामने रखती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर पुस्तक को एक विशेष तोहफे के रूप में प्रस्तुत करते हुए लेखक ने इसे एक ऐसे दस्तावेज का स्वरूप देने की कोशिश की है, जिसमें बीते 12 वर्षों की नीतियों और विकास कार्यों के साथ भविष्य के भारत की कल्पना भी मौजूद है।
इतिहास, राजनीति और विकास के बदलते संदर्भों को दर्ज करने की लेखक की परंपरा में ‘मोदी युग का भारत’ एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है। यह पुस्तक जहां मौजूदा दौर की विकास नीतियों को समझने का प्रयास करती है, वहीं पाठकों को यह सोचने के लिए भी प्रेरित करती है कि आज के फैसले आने वाले भारत की तस्वीर को किस तरह आकार दे सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

