पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा गुवाहाटी रिंग रोड प्रोजेक्ट

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पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा गुवाहाटी रिंग रोड प्रोजेक्ट


गुवाहाटी, 14 मई, (हि.स.)। केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट-एक्ट फर्स्ट पॉलिसी के तहत पूर्वोत्तर राज्यों का विकास जिस तेजी से हो रहा है। इससे आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत विकसित भारत के विकास का इंजन बन सकेगा। पूर्वोत्तर भारत का द्वार कहे जाने वाले गुवाहाटी शहर के विकास से न सिर्फ पूर्वोत्तर भारत के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि आसियान देशों के लिए भी व्यापार के दरवाजे गुवाहाटी से खुल जाएंगे। ऐसे महत्व वाले शहर गुवाहाटी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है गुवाहाटी रिंग रोड प्रोजेक्ट।

करीब 5,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली महत्वाकांक्षी गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना को पूर्वोत्तर भारत की सड़क संपर्क व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला माना जा रहा है। इस परियोजना से गुवाहाटी शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर परिवहन व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) टोल मॉडल के तहत दिनेशचंद्र आर अग्रवाल इंफोकोन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपे गए इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 121 किलोमीटर होगी। परियोजना के प्रमुख हिस्सों में बाइहाटा चारियाली से सोनापुर तक 55.54 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड नॉर्दर्न बाइपास का निर्माण शामिल है।

परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में ब्रह्मपुत्र नद पर कुरुआ से नारेंगी के बीच प्रस्तावित छह लेन का पुल भी शामिल है। लगभग तीन किलोमीटर लंबे इस पुल से मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही इससे गुवाहाटी शहर के भीतर मौजूदा मार्गों पर यातायात का दबाव भी कम होगा।

बाइपास और पुल निर्माण के अलावा एनएच-27 के कुछ हिस्सों को चौड़ा करने की योजना भी बनाई गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से सिलचर, शिलांग और अपर असम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक संपर्क बेहतर होगा तथा व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

वन भूमि हस्तांतरण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी पहले ही प्रदान की जा चुकी है। हालांकि, हाथी गलियारों (एलिफेंट कॉरिडोर) की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई शर्तें भी लगाई गई हैं। वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए बशिष्ठ और जोराबाट के बीच एलिवेटेड रोड सेक्शन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 के मानसून के बाद निर्माण शुरू हो चुका है, जबकि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से 2027 से 2030 के बीच पूरा किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 30 वर्ष की कंसेशन अवधि वाले इस मॉडल में चार वर्ष निर्माण के लिए निर्धारित किए गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

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