लालकृष्ण आडवाणी के 100वें जन्मदिन पर असम भाजपा ने दी बधाई, राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया याद

WhatsApp Channel Join Now
लालकृष्ण आडवाणी के 100वें जन्मदिन पर असम भाजपा ने दी बधाई, राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया याद


भाजपा के संस्थापक नेताओं में शामिल आडवाणी के राजनीतिक और संगठनात्मक योगदान की सराहना- असम एवं पूर्वोत्तर की सुरक्षा और विकास में उनकी भूमिका को भी किया रेखांकित

गुवाहाटी, 08 नवंबर (हि.स.)। भारतीय राजनीति में हिंदू चेतना या हिंदुत्व की धारणा से नए युग की शुरुआत कर हिंदुत्व को एक मजबूत राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप में स्थापित करने वाले पूर्व उपप्रधानमंत्री, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक, भारत रत्न लाल कृष्ण आडवाणी का आज 100वां जन्मदिन है। 1984 के भारत के सामान्य चुनाव में केवल 2 सीटों की जीत के साथ राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाली भाजपा ने आडवाणी के मजबूत नेतृत्व में वर्तमान विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में खुद को स्थापित किया।

आडवाणी ने 1990 में गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक ऐतिहासिक राम रथ यात्रा के माध्यम से पूरे देश के हिंदू समाज में अपने धर्म के लिए गर्व की राष्ट्रीय चेतना जगाई। उनके नेतृत्व में करोड़ों हिंदू भगवान राम की जन्मभूमि के उद्धार के लिए जागरूक हुए और इसके परिणामस्वरूप करोड़ों भारतीयों के सपने सच होते हुए अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ।

लालकृष्ण आडवाणी के 99 वर्ष पूरे होने तथा 100वें वर्ष में प्रवेश करने पर असम प्रदेश भाजपा ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। पार्टी ने भाजपा के गठन, संगठनात्मक विस्तार, राम मंदिर आंदोलन और राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत करने में उनके योगदान को याद किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रांजल कालिता ने रविवार को जारी बयान में आडवाणी के राजनीतिक जीवन और उनके वैचारिक योगदान का उल्लेख किया।

प्रांजल कालिता ने कहा कि वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में महज दो सीटें जीतने वाली भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है। पार्टी के इस सफर में आडवाणी के नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1990 में गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक निकाली गई उनकी ऐतिहासिक राम रथ यात्रा ने राम मंदिर आंदोलन को देशव्यापी पहचान दिलाई और हिंदू सांस्कृतिक चेतना से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया।

बयान में कहा गया है कि आडवाणी ने राम मंदिर आंदोलन को केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं माना, बल्कि इसे सांस्कृतिक स्वाभिमान और चेतना के जागरण से जुड़ा राष्ट्रीय आंदोलन बताया। उनकी विचारधारा में हिंदुत्व केवल धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक था। उनका मानना था कि भारत की राष्ट्रीय पहचान उसकी प्राचीन सनातन संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ी है। उन्होंने जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर हिंदू समाज को संगठित करने तथा दलितों और पिछड़े वर्गों को धार्मिक स्थलों पर समान अधिकार देने की भी वकालत की।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं दरंग-उदालगुरी के सांसद दिलीप सैकिया ने आडवाणी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए कहा कि भाजपा के उत्थान और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रसार में उनका योगदान अतुलनीय है। भारत माता की सेवा के लिए समर्पित उनका जीवन और आदर्श पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि आदर्शनिष्ठ राजनीति, संगठनात्मक दक्षता और देश के प्रति निःस्वार्थ सेवा की भावना ने आडवाणी को भारतीय राजनीति में विशिष्ट पहचान दिलाई है। भाजपा की स्थापना, विकास और संगठनात्मक आधार मजबूत करने में उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी।

15 वर्ष की उम्र में संघ से जुड़े थे आडवाणी

8 नवंबर, 1927 को कराची में जन्मे लालकृष्ण आडवाणी वर्ष 1942 में महज 15 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े थे। वर्ष 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा भारतीय जनसंघ की स्थापना के बाद उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और राजस्थान के सचिव का दायित्व संभाला। वर्ष 1973 में वे भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार की ओर से आपातकाल लागू किए जाने के बाद आडवाणी को भी अन्य विपक्षी नेताओं के साथ जेल में रखा गया। आपातकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 1977 में बनी पहली गैर-कांग्रेसी जनता पार्टी सरकार में उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

वर्ष 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उन्होंने भाजपा की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में वे कई बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वर्ष 1998 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 2002 से 2004 तक वे देश के उपप्रधानमंत्री रहे। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। उनके राजनीतिक योगदान के लिए वर्ष 2015 में पद्म विभूषण और वर्ष 2024 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

असम आंदोलन और पूर्वोत्तर की सुरक्षा को लेकर भी रहे मुखर

असम और पूर्वोत्तर भारत के साथ भी आडवाणी का राजनीतिक जुड़ाव रहा है। असम आंदोलन के दौरान उन्होंने और अटल बिहारी वाजपेयी ने अखिल असम छात्र संघ (आसू) के नेतृत्व में चल रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ आंदोलन का समर्थन किया था। उन्होंने असमिया समाज की पहचान और अस्तित्व से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।

वर्ष 1998 से 2004 तक केंद्रीय गृह मंत्री रहते हुए आडवाणी ने बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ को असम की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। इस दौरान भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम को गति देने और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए प्रभावी उपायों पर जोर दिया गया। उन्होंने स्थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा और अवैध रूप से प्रवेश करने वालों की पहचान के लिए ठोस व्यवस्था की आवश्यकता भी बताई।

असम में उल्फा सहित विभिन्न उग्रवादी संगठनों की हिंसक गतिविधियों के दौर में उन्होंने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और उग्रवाद से निपटने के लिए केंद्र की ओर से सहयोग देने पर जोर दिया। साथ ही विद्रोही संगठनों को मुख्यधारा में लाने और शांति वार्ता की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का समर्थन किया।

वर्ष 2012 में बोडोलैंड क्षेत्र में जातीय हिंसा के दौरान आडवाणी ने कोकराझार का दौरा किया था। उन्होंने राहत शिविरों में रह रहे प्रभावित लोगों से मुलाकात की और उनके पुनर्वास का मुद्दा उठाया। इस संबंध में उन्होंने संसद में पांच सूत्री सुझाव भी प्रस्तुत किए थे।

असम में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार में भी योगदान

असम में भाजपा की राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में भी आडवाणी की भूमिका का उल्लेख किया गया है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने असम का दौरा किया और क्षेत्रीय दल असम गण परिषद (अगप) के साथ चुनावी गठबंधन को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। अपनी देशव्यापी जनचेतना यात्रा के दौरान उन्होंने गुवाहाटी को भी शामिल किया था।

असम भाजपा के अनुसार, आडवाणी ने पूर्वोत्तर को केवल एक भौगोलिक क्षेत्र के रूप में नहीं देखा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिहाज से इसके महत्व को हमेशा रेखांकित किया। पार्टी का मानना है कि उनके राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और राष्ट्रवादी विचारधारा ने असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा के विस्तार की जमीन तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

774224 Articles

Share this story