भारतीय सेना ने युद्धाभ्यास 'मरू संग्राम' में दिखाई स्वदेशी हथियार, ड्रोन और टैंक की ताकत

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भारतीय सेना ने युद्धाभ्यास 'मरू संग्राम' में दिखाई स्वदेशी हथियार, ड्रोन और टैंक की ताकत


जोधपुर, 30 मार्च (हि.स.)। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर भारतीय सेना की कोणार्क कॉर्प्स ने राजस्थान के रेगिस्तानी सेक्टर के आगे के इलाकों में रविवार तक युद्ध अभ्यास पूरा किया। यह अभ्यास सुबह से रात तक चला, जिसमें जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल एवीएस राठी ने मौके पर पहुंचकर टैंक, तोप, हेलीकॉप्टर और ड्रोन सिस्टम का निरीक्षण किया। अभ्यास में स्वदेशी हथियारों के साथ सेना की तैयारी और अलग-अलग हालात में काम करने की क्षमता को परखा गया। कोर ने आधुनिक तकनीक और युद्धक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अपनी बैटल रेडी स्थिति दिखाई।

सेना के अनुसार प्रदर्शन के दौरान सेना ने ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम पर विशेष जोर दिया। निगरानी से लेकर सटीक हमला करने तक, ड्रोन्स की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। साथ ही, दुश्मन के ड्रोन्स को बेअसर करने वाली तकनीक का भी सफल परीक्षण किया गया। रेतीले टीलों के बीच टैंकों और बीएमपी गाडिय़ों ने अपनी गति और निशाने की क्षमता दिखाई। मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री यूनिट्स ने कठिन भूभाग में मूवमेंट और ऑपरेशन को परखा, जिससे अलग-अलग युद्ध परिस्थितियों में काम करने की तैयारी जांची गई।

तोपखाने में बोफोर्स और अन्य आर्टिलरी गन से लक्ष्य पर सटीक मार की क्षमता का परीक्षण किया गया। अटैक हेलीकॉप्टरों ने हवा से जमीन पर हमले का अभ्यास करते हुए तय लक्ष्यों को निशाना बनाया। अभ्यास में ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम पर खास ध्यान दिया गया। ड्रोन से निगरानी और लक्ष्य की पहचान की गई, जबकि काउंटर सिस्टम ने दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करने की तकनीक का परीक्षण किया।

स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर प्रचंड और रुद्र को ऊंचाई वाले क्षेत्रों और रेगिस्तान दोनों के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें 20 एमएम की गन, रॉकेट और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी होती हैं। ये हेलिकॉप्टर जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर तेज और सटीक हमला कर सकते हैं।

अभ्यास का प्रमुख फोकस स्वदेशी हथियारों पर रहा। स्ट्रेला-10 सहित कई सिस्टम का इस्तेमाल कर सेना ने आत्मनिर्भरता और नई तकनीक को प्रदर्शित किया। इससे भविष्य के ऑपरेशन में इन सिस्टम की उपयोगिता को परखा गया।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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