एएनआरएफ ने चुने 10 बहुविषयक अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र, सामाजिक चुनौतियों के समाधान पर होगा फोकस

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एएनआरएफ ने चुने 10 बहुविषयक अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र, सामाजिक चुनौतियों के समाधान पर होगा फोकस


नई दिल्ली, 20 मई (हि.स.)। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने देश में बहुविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “बहुविषयक अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र (सीओई)” कार्यक्रम के तहत 10 प्रमुख संस्थानों का चयन किया है। इन केंद्रों के माध्यम से सामाजिक विज्ञान, मानविकी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को एक साथ जोड़कर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की जटिल समस्याओं के समाधान खोजे जाएंगे।

एएनआरएफ की ओर से बुधवार को जारी जानकारी के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप तैयार की गई है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुसंधान आधारित व्यावहारिक समाधान विकसित करना है, जिससे समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

सीओई कार्यक्रम के लिए जिन संस्थानों का चयन किया गया है उनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान धारवाड़, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान अगरतला, भारतीय प्रबंधन संस्थान जम्मू, इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट, चाणक्य विश्वविद्यालय तथा पीएसजीआर कृष्णम्मल महिला महाविद्यालय शामिल हैं।

इन संस्थानों में जलवायु परिवर्तन, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ग्रामीण आजीविका, भाषा अध्ययन, स्वास्थ्य एवं मनोविज्ञान, डिजिटल मानविकी तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) जैसे विषयों पर अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में समेकित अनुसंधान से सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही, तकनीक और सामाजिक विज्ञान के समन्वय से ऐसे समाधान विकसित किए जा सकेंगे जो आम लोगों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला सकें।

फाउंडेशन के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए देशभर से कुल 945 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। विस्तृत मूल्यांकन और विशेषज्ञ समीक्षा के बाद 10 संस्थानों का चयन किया गया। चयनित परियोजनाओं में 20 सहयोगी संस्थान भी शामिल हैं, जिनमें केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय, आईआईटी, एनआईटी, निजी विश्वविद्यालय और विभिन्न अनुसंधान संस्थान शामिल हैं।

एएनआरएफ का कहना है कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और बड़े आंकड़ा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे दौर में बहुविषयक अनुसंधान सामाजिक-आर्थिक विकास, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

फाउंडेशन के अनुसार, यह पहल न केवल अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करेगी बल्कि देश में नवाचार, नीति निर्माण और तकनीकी विकास को भी नई गति प्रदान करेगी।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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