अमित शाह ने गुजराती भाषा में ‘आदि शंकराचार्य ग्रंथावली’ का किया विमोचन
केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा-गुजराती साहित्य के लिए यह ऐतिहासिक क्षण
अहमदाबाद, 15 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को अहमदाबाद में प्रसिद्ध विद्वान डॉ. गौतमभाई पटेल की
गुजराती भाषा में संपादित ‘आदि शंकराचार्य सम्पूर्ण ग्रंथावली’ (15 ग्रंथों की श्रृंखला) का विमोचन किया। यह ‘सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट’ से
प्रकाशित हुई है।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने भारतीय संस्कृति में आदि शंकराचार्य के योगदान और सस्तु साहित्य संस्था के पुनरुत्थान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब आदि शंकराचार्य का ज्ञान गुजराती युवाओं के लिए उंगलियों पर उपलब्ध हो गया है। उन्होंने इसे गुजराती साहित्य के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि 117 वर्ष पुरानी स्वामी अखंडानंद द्वारा स्थापित संस्था ‘सस्तु साहित्य’ का पुनर्जागरण हुआ है और आने वाले 50 वर्षों तक यह श्रेष्ठ साहित्य प्रदान करती रहेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. गौतम पटेल ने संस्कृत के ज्ञानसागर को गुजराती भाषा में अनुवाद कर गुजरात के पाठकों पर बड़ा उपकार किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य सनातन धर्म के महान पुनरुद्धारक थे। उन्होंने मात्र 8 वर्ष की आयु में वेदों का अध्ययन पूरा कर लिया था और 12 वर्ष में शास्त्रज्ञ बन गए थे। 32 वर्ष के अल्पायु जीवन में उन्होंने देश की चार दिशाओं में चार मठों की स्थापना कर धार्मिक ही नहीं बल्कि वैदिक शिक्षा के केंद्र विकसित किए। उन्होंने कहा,“आज हम गंगा, यमुना और नर्मदा की जो पूजा विधियां और श्लोक पढ़ते हैं, उनके रचयिता आदि शंकराचार्य ही हैं।” डॉ. गौतम पटेल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि अब शंकराचार्य का संपूर्ण ज्ञान संस्कृत से मातृभाषा गुजराती में उपलब्ध हुआ है, जो नई पीढ़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से विवेक चूड़ामणि और भज गोविंदम् जैसे ग्रंथ पढ़ने का आग्रह किया।
शाह ने विश्वास जताया कि आने वाले 50 वर्षों में जब साहित्य की चर्चा होगी, तब इस ग्रंथावली के प्रकाशन को स्वर्ण अक्षरों में याद किया जाएगा।
स्वामी अखंडानंद द्वारा स्थापित ‘सस्तु साहित्य’ संस्था को लेकर भावुक होते हुए केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि उनके दादा कहा करते थे, “अखंडानंद का साहित्य पढ़ो, घर में शुभ आएगा।” उन्होंने बताया कि मार्च 2025 में ट्रस्ट ने 24 पुराने ग्रंथों के नए संस्करण प्रकाशित किए गए, जिन्हें पाठकों का शानदार प्रतिसाद मिला।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत में तो शंकराचार्य का साहित्य उपलब्ध था, लेकिन भारतीय भाषाओं में और विशेषकर गुजराती में इतने व्यापक स्तर पर पहली बार अनुवाद हुआ है। उन्होंने
कहा कि मात्र 32 वर्ष के जीवन में शंकराचार्य ने पूरे भारत की यात्रा कर सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने चार मठों की स्थापना कर अखंड भारत की भावना को सशक्त किया।
उन्होंने शंकराचार्य के अद्वैत सिद्धांत को जीवन पद्धति बताते हुए कहा कि आज के समय की समस्याओं का समाधान इसी दर्शन में निहित है।
इस अवसर पर ग्रंथावली के संपादक डॉ. गौतम पटेल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री दर्शना वाघेला, अहमदाबाद की मेयर प्रतिभाबेन जैन, ट्रस्टीगण, सांसद, विधायक, वरिष्ठ पदाधिकारी, साहित्य प्रेमी और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

