जनजातीय समाज को यूसीसी से डरने की जरूरत नहीं : अमित शाह
नई दिल्ली, 24 मई (हि.स.)। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' में कहा कि देश के आदिवासी समाज को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से डरने की जरूरत नहीं है। देश के गृहमंत्री होने के नाते वे आश्वासन देते हैं कि जनजातीय समाज को इससे अलग रखा जाएगा।
दिल्ली के लाल किला में वनवासी कल्याण आश्रम और जनजातीय सुरक्षा मंच की ओर से आयोजित जनजातीय समागम में आज गृहमंत्री शामिल हुए। इसमें देशभर के विभिन्न राज्यों की 01 लाख से अधिक जनजातियों के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ शामिल हुए।
गृहमंत्री ने दोनों संगठनों की जनजाति समाज को एकजुट करने और उन्हें समाज के अन्य वर्गों से जोड़ने के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस आयोजन को जनजातियों के महाकुंभ के रूप में पहचाना जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा कि यह सांस्कृतिक समागम आने वाले अनेक वर्षों तक जनजातियों के अस्तित्व, अस्मिता और संस्कृति के आंदोलन को नई पहचान देने के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि मैंने भगवान बिरसा मुंडा को नहीं देखा, लेकिन आज यहां उपस्थित जनजातियों में उनकी छवि प्रतिबिंबित हो रही है, मैं उनको नमन करता हूं।
शाह ने सतत विकास के मूलाधार को बताते हुए भगवान बिरसा मुंडा के जल, जंगल जमीन को संरक्षित करने के प्रयास को सार्वभौमिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति पूजा ही सनातन संस्कृति का मूल आधार है।
शाह ने परोक्ष रूप से धर्म परिवर्तन पर निशाना साधा और कहा कि प्रकृति पूजन करने वाला जनजातीय समाज सनातन संस्कृति का हिस्सा है और इसे बचाने का संकल्प लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने समय में शबरी के झूठे बेर खाकर और निषाद राज के पैर धोकर हमें एकता का संदेश दिया था।
उन्होंने कहा कि यह जनजातीय समागम देश के अंदर भेद पैदा करने वाले लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है। यह लोग समान नागरिक संहिता के नाम पर जनजातीय समाज को डरा रहे हैं कि उन पर पाबंदियां लग जाएगी।
शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने पांच दशक की नक्सल समस्या को आज देश से पूरी तरह से खत्म कर दिया है। अब समय जनजातीय समाज के विकास के कार्यों को आगे बढ़ाने का है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में ही अलग से मंत्रालय बनाकर यह काम शुरू हो चुका था और वर्तमान सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकारों के मुकाबले बजट में करीब 6 गुना की बढ़ोतरी कर जनजातीय समाज के लिए बड़े स्तर पर काम किया है।
इस दौरान गृहमंत्री ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से लाए गए आदिवासी ग्राम सभाओं को जल, जंगल, जमीन, खनिज और स्थानीय विवाद सुलझाने से जुड़े ‘पेसा’ कानून कानून की सराहना की और कहा कि यह आइडियल कानून अब भारतीय जनता पार्टी की सरकारों की ओर से आगे बढ़ने का काम किया जाएगा।
जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि जनजातियों में धर्मांतरण का प्रभाव काफी तेजी से दिखाई पड़ रहा है, जो हमारे समाज के लिए कैंसर है। उन्होंने कहा कि आज यहां उपस्थित जनजाति समाज एक जनसमुद्र है।
जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ राज किशोर हांसदा ने कहा कि धर्मपरिवर्तन कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे। अगर हम परिवर्तित हो जायेंगे तो हमारी संस्कृति समाप्त हो जाएगी।
जनजाति सुरक्षा मंच के हर्ष चौहान ने कहा कि जनजातीय समाज भारत की रक्षा करता है। पूरे भारत में व्याप्त 700 से अधिक जनजतीय समाज मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया। उन्होंने कहा कि जनजाति सनातन धर्म के मूल है और जो कहते है हमारा कोई धर्म नहीं है हम उनके विरोधी है।
तेची गुबिन ने कहा कि अपने अपने जाति में जो धर्मांतरण हो रहा है उसको तेजी से रोकने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत सरकार से मांग किया कि जो धर्मांतरण स्वीकार कर लिए है वे आरक्षण का दोहरा लाभ न उठा सके इसके लिए अनुच्छेद 314 के तहत उनके आरक्षण को समाप्त कर दिया जाए।
बुधरी ताती ने कहा कि हमारी मातृ शक्ति जब जागती है उसे कोई रोक नहीं सकता है। उन्होंने अपने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे आगे आए और साथ मिलकर अपने समाज के सुरक्षित करने का प्रयास करे। ताती जी ने कहा कि जो अपने समाज की सुरक्षा आज करता है उनकी आने वाली पीढ़ी सुरक्षित होती है।
जनजातीय आयोग के सलाहकार व पूर्व जज प्रकाश उईके ने कहा कि मिशनरियों के कहने पर बिरसा मुंडा को जेल में डाला गया था। उन्होंने कहा कि जेल में रहते हुए भी भगवान बिरसा मुंडा जब टहलते थे तो उनसे अंग्रेजी हुकूमत खौफ खाती थी। भगवान बिरसा मुंडा का संपूर्ण जीवन जल, जंगल, जमीन को बचाने के प्रति समर्पित रहा। यही संघर्ष हमारे संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रहा है।
वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने कहा कि बिरसा समस्त जनजातियों के भगवान रूपी आदर्श पुरुष है। उन्होंने कार्यक्रम को जनजाति समाज के लिए कुंभ की संज्ञा प्रदान किया। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से संघर्ष किया, धर्मांतरण को रोकने के लिए संघर्ष किया।
अध्यक्ष ने कहा कि जनजाति समाज सरकार के साथ सहयोग की भूमिका रही है और आगे भी रहेगी।
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया।
इस आयोजन में देशभर के जनजाति समाज की सांस्कृतिक अस्मिता, आस्था और पारंपरिक जीवन मूल्यों की झाँकी बड़े स्तर पर देखने को मिली। इस ऐतिहासिक समागम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 1.5 लाख जनजातीय समाज के प्रतिनिधि एवं समाजबंधुओं की सहभागिता देखने को मिली। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह से विशेष प्रतिनिधिमण्डल उपस्थित था।
आयोजन के अंतर्गत राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदसिया बाग (कश्मीरी गेट), श्यामगिरि मंदिर (शास्त्री पार्क बस डिपो के पास) से लाल किले के ग्राउंड में शोभायात्रा पहुची। आयोजन को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में दिल्ली पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन ने सहयोग किया।
देशभर से आने वाले जनजातीय प्रतिभागियों के ठहरने के लिए दिल्ली के 79 विभिन्न स्थानों पर आवासीय व्यवस्थाएं की गयी थी।
आयोजक समिति प्रकाश उईके, महेश भाग चन्दका, अशोक कुमार गोंड के साथ जनजाति समाज के कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

