नक्सल मुक्त बस्तर को विकास और समृद्धि का मॉडल बनाएंगे : अमित शाह
जगदलपुर, 19 मई (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है और अगले पांच वर्षों में बस्तर को नक्सल मुक्त कर विकास, समृद्धि और संतृप्ति के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में विश्वास और भविष्य के प्रति आशा का वातावरण दिखाई दे रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि बस्तर के विकास की कार्ययोजना में स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार केवल सड़क, भवन और अन्य आधारभूत संरचना विकसित करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार सृजन, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और आदिवासी समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि अब सेवा डेरों के माध्यम से ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। बैंकिंग, डिजिटल सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर देश के अन्य हिस्सों की तुलना में विकास की दौड़ में 30-40 वर्ष पीछे रह गया है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार यहां आधारभूत संरचना, सिंचाई परियोजनाएं, रेलवे कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर तेजी से काम कर रही है।
उन्होंने बस्तरवासियों और विशेष रूप से आदिवासी समाज से अपील करते हुए कहा कि जो लोग दशकों तक बंदूक के साए में बस्तर को रोककर रखना चाहते थे, उनके बहकावे में न आएं। उन्हाेंने कहा कि वे भेष बदलकर बहकाने के लिए आयेंगे, बहकावे में मत आना, बहकावे के लिए आने वालाें से बस्तर की जनता बात करना चाहती है ताे उनसे 50 साल का हिसाब मांगना, फिर बात करेंगें। उन्होंने कहा कि जनता को अपनी चुनी हुई पंचायत, जिला पंचायत, राज्य सरकार और भारत सरकार पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि यही संस्थाएं बस्तर को विकास की नई दिशा दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में अब नए सूर्योदय की शुरुआत हो चुकी है और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर यहां के युवाओं, महिलाओं और आदिवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुरक्षा से विश्वास, विश्वास से विकास, विकास से समृद्धि और समृद्धि से संतृप्ति की कार्य योजना तैयार की है, जिसमें युवाओं और महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए वैज्ञानिक कार्यक्रम तैयार करना। जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित करना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले पांच वर्षों में बस्तर के नागरिकों की औसत आय 6 गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से शुरू किए गए बस्तर पंडूम ने स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम किया है। बस्तर पंडूम में स्थानीय भाषा, व्यंजन, हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं को मंच दिया गया। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पहले शुरू हुए इस आयोजन में पहले चरण में 45 हजार लोगों ने भाग लिया था, जबकि बाद में यह संख्या बढ़कर 3 लाख 54 हजार तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि गांव स्तर से शुरू होकर तहसील, जिला और संभाग स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिससे बड़ी संख्या में लोग अपनी संस्कृति के संरक्षण से जुड़े।
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि बस्तर में सुरक्षा बलों द्वारा स्थापित 200 कैंपों में से 70 कैंपों को अब वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा में बदला जाएगा। उन्होंने बताया कि इन सेवा डेरों का उद्देश्य सरकार को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना है। यहां बैंकिंग सुविधाएं, आधार कार्ड निर्माण, डिजिटल सेवाएं, कॉमन सर्विस सेंटर, सस्ती राशन दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्हाेंने कहा कि कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक बस्तर का हर नागरिक विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ जाता, तब तक नक्सलवाद की समाप्ति अधूरी मानी जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

