धार की भोजशाला पर उच्च न्यायालय का फैसला स्वागतयोग्यः डॉ. आलोक त्रिपाठी

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धार की भोजशाला पर उच्च न्यायालय का फैसला स्वागतयोग्यः डॉ. आलोक त्रिपाठी


नई दिल्ली, 15 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को धार की भोजशाला विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने भोजशाला को मंदिर करार दिया है और हिंदू पक्ष की मांग मंजूर कर ली है। न्यायालय के इस फैसले पर भोजशाला पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की तरफ से रिपोर्ट तैयार करने की टीम का नेतृत्व करने वाले अतिरिक्त महानिदेशक रहे डॉ. आलोक त्रिपाठी ने संतोष जताया है। उन्होंने न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी 2190 पेज की रिपोर्ट से सच्चाई उजागर हुई। इन दिनों डॉ आलोक त्रिपाठी असम यूनिवर्सिटी सिलचर में इतिहास के प्रोफेसर हैं। वे अंडरवॉटर आर्कियोलॉजिकल विंग के अध्यक्ष रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार के साथ उन्होंने साक्षात्कार में बताया कि कार्य कठिन था लेकिन उद्देश्य विशाल था जिसकी परिणति सुखद है।

डॉ. आलोक त्रिपाठी ने बताया कि साल 2024 में न्यायालय के आदेश पर एएसआई ने टीम बनाई जिसका नेतृत्व उन्होंने किया। भोजशाला में तथ्य जुटाने के लिए 98 दिनों तक खुदाई औऱ साक्ष्य जुटाने के लिए सर्वे का काम किया गया। सर्वे में 106 मूल आधार स्तंभ और 82 अर्धस्तंभ मिले, जिन पर हिंदू धर्म से संबंधित नक्काशी है। 94 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और प्रतिमाओं के टुकड़े मिले। दीवारों पर संस्कृत और प्राकृत में 'श्री सरस्वत्यै नमः' जैसे शिलालेख मिले हैं। अन्य साक्ष्य: परिसर में त्रिशूल का पेंटिंग, कलश और विष्णु की खंडित प्रतिमा मिले। परमार कालीन सिक्के भी मिले। उन्होंने बताया कि 98 दिनों तक सर्वे के काम के बाद रिपोर्ट तैयार करने में 15 दिन लगे। सर्वे औऱ खुदाई में निकले साक्ष्यों औऱ तथ्यों के आधार पर तैयार 2190 पेज की रिपोर्ट को न्यायालय को सौंपा।

डॉ. आलोक त्रिपाठी ने बताया कि उन्हें न्यायालय के फैसले पर गर्व की अनुभूति हो रही है। साथ ही उन्होंने अपनी टीम का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने टीम के सारे सदस्यों ने कठिन परिस्थितियों में काम किया। आखिरकार इस रिपोर्ट को न्यायालय में स्वीकृति मिली। एएसआई के कार्य को स्वीकृति मिली। यह बेहद संतोषजनक है।

उन्होंने बताया कि कार्य के दौरान स्थानीय प्रशासन से बहुत सहयोग मिला। दिनरात बहुत मेहनत से काम किया। जैसा कोर्ट के आदेश के तहत दोनों पक्षों के सदस्य रहते थे। इस प्रकार से हमें कोई दिक्कत नहीं आई। जी जान से किए गए काम की परिणति थी। 2190 पेज की रिपोर्ट समय अवधि में पूरा हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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