कृषि विकास को नई रफ्तार देने के लिए उत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन लखनऊ में शुक्रवार को
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय शुक्रवार को लखनऊ में उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन करेगा। इस सम्मेलन में उत्तर भारत के राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों, एफपीओ, स्टार्टअप्स, केवीके, वित्तीय संस्थानों और खरीद एजेंसियां भाग लेंगी। उनकी भागीदारी के माध्यम से खेती, किसान आय, तकनीक, विपणन और कृषि अवसंरचना से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
सम्मेलन की तैयारियों को लेकर बुधवार को कृषि भवन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में दिशा-निर्देश दिए।
कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक, समावेशी और किसानोन्मुख बनाने के उद्देश्य से उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन 24 अप्रैल को लखनऊ में किया जा रहा है। यह सम्मेलन देशभर में आयोजित हो रही जोनल कॉन्फ्रेंस शृंखला का उत्तर क्षेत्र का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसके बाद दक्षिण, उत्तर-पूर्व, पूर्व और अंततः राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन भी आयोजित होना है। सम्मेलन में दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे उत्तर क्षेत्र के राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी रहेगी। यह व्यापक भागीदारी इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार कृषि विकास को साझा जिम्मेदारी और साझा समाधान के मॉडल पर आगे बढ़ा रही है।
इस सम्मेलन में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मेलन को संबोधित करेंगे। मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी कि इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल औपचारिक समीक्षा करना ही नहीं, बल्कि प्रमुख कृषि योजनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर विषयवार विस्तृत चर्चा रखी गई है। कार्यक्रम में कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, बागवानी संभावनाएं, आत्मनिर्भर भारत के तहत दलहन मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, फार्मर रजिस्ट्री, उर्वरकों की उपलब्धता, संतुलित उपयोग और कालाबाजारी पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
विभिन्न राज्यों की सफल पहलों को साझा करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश द्वारा गन्ने के साथ अंतरफसली खेती और डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस, हरियाणा द्वारा भूमि अभिलेख एवं “मेरी फसल मेरा ब्यौरा”, पंजाब द्वारा धान से फसल विविधीकरण तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड द्वारा बागवानी क्षेत्र की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा। इस सम्मेलन का स्वरूप बहु-हितधारक संवाद का है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि, केवीके विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, महिला किसान उत्पादक संगठन, स्टार्टअप्स, मिलर्स, एग्री-टेक कंपनियां, वैल्यू चेन पार्टनर्स, नाबार्ड, नाफेड, एनसीसीएफ, एनएससी और अन्य संस्थाएं एक मंच पर उपस्थित रहेंगी। इस प्रकार यह सम्मेलन नीति निर्माण और जमीनी अनुभवों के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करेगा।
सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव अतिश चंद्र, अतिरिक्त सचिवगण, संयुक्त सचिवगण, कृषि आयुक्त, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट तथा विभिन्न विषयों के प्रमुख वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी शामिल रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

