संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में कार्य विस्तार व निगेटिव नैरेटिव पर होगा चिंतन



नागपुर, 25 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की 12 से 14 मार्च तक होने वाली बैठक में सांगठनिक कार्य विस्तार, संपर्क विस्तार और भारत के खिलाफ समय-समय पर बनाये जाने वाले निगेटिव नैरेटिव पर चिंतन होगा। इसके अलावा अन्य प्रमुख विषयों पर भी देशभर से इकठ्ठा होने वाले प्रतिनिधि चिंतन करेंगे।

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बुधवार को ट्विटर के जरिए बताया कि 12, 13 एवं 14 मार्च को हरियाणा के समालखा (सोनीपत) में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक होने वाली है। बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, डॉ. मनमोहन वैद्य, मुकुंद, रामदत्त, अरुण कुमार और संघ के अन्य सभी प्रमुख पदाधिकारी सहभागी रहेंगे। सभी प्रांतों से सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों, क्षेत्र एवं प्रांत के संघचालक, कार्यवाह, प्रचारकों के साथ संघ प्रेरित विविध संगठन के अखिल संगठन मंत्री और उनके सहयोगी भी बैठक में हिस्सा लेंगे। संघ और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों के देशभर से 1450 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। विगत वर्ष 2022 में गुजरात के कर्णावती में हुई बैठक में तय बिंदुओं पर प्रगति की चर्चा भी समालखा में होने वाली बैठक में होगी। प्रतिनिधि सभा में संघ के कार्य विस्तार और समय-समय पर भारतीय समाज, सभ्यता, परंपराएं और अन्य चीजों के बारे में फैलाए जाने वाले निगेटिव नैरेटिव पर चिंतन किया जाएगा। भारत के बारे मे फैलाई जानेवाली नकारात्मकता को रोकने पर संघ विशेष चिंतन करेगा।

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का स्वरूप

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ की सर्वोच्च नीति-निर्धारक इकाई है। इसकी बैठक हर साल होली पर्व के आसपास होती है। इसमें देशभर के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। संघ की इस वार्षिक बैठक में जो प्रस्ताव पारित होते हैं वह भी संस्था केंद्रित न होकर राष्ट्र केंद्रित होते हैं। प्रतिनिधि सभा की बैठक में पारित होने वाले प्रस्तावों के विषयों का सीधा संबंध संघ के उद्देश्य राष्ट्र का परमवैभव अर्थात सर्वांगीण विकास के साथ ही होता है। प्रतिनिधि सभा के समक्ष चर्चा के लिए रखे जाने वाले प्रस्तावों पर एक क्रमबद्ध प्रक्रिया के तहत विचार विमर्श होता है। पहले इन प्रस्तावों के विषयों पर अखिल भारतीय कार्यकारणी में चर्चा होती है। फिर अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल में चर्चा होती है। इसके बाद इन प्रस्तावों को प्रतिनधि सभा में प्रस्तुत करके इन पर बहुत विस्तार से मनन होता है। यही कारण है कि यहां मतदान की नौबत नहीं आती। बस एक उंची ॐ ध्वनि के साथ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हो जाते हैं।

अगले वर्ष नागपुर में होगी बैठक

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक देश के विभिन्न शहरों में आयोजित की जाती है। हर चौथी बैठक नागपुर में होती है। इस बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव किया जाता है। इस कड़ी में 2021 की बैठक बेंगलुरु, 2022 की बैठक कर्णावती, 2023 में सोनीपत (हरियाणा) और 2024 की सबसे अहम बैठक नागपुर में आयोजित होगी। संघ को 2025 में सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। नतीजतन शताब्दी वर्ष के आयोजन और सरकार्यवाह के चुनाव के मद्देनजर 2024 की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बेहत अहम मानी जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार/मनीष/

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