धर्मान्तरण हमारे धर्म के लिए बहुत बड़ी चुनौती : वासुदेवानंद सरस्वती



--संत सम्मेलन में सन्तों ने एक स्वर में भरी हुंकार

--समलैंगिकता संस्कार को समाप्त करने और हमारी संस्कृति से खिलवाड़ करने का कुचक्र

प्रयागराज, 25 जनवरी (हि.स.)। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने विहिप के संत सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आज धर्मांतरण हमारे धर्म के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। हमें अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए सजग रहना चाहिए। हिन्दू समाज सहनशील है, धैर्यवान है। लेकिन उसके धर्म के अस्तित्व पर जब संकट खड़ा होगा तो उसका जवाब देने में हम सक्षम भी हैं।

संत सम्मेलन में शंकराचार्य ने आगे कहा कि आज हिन्दू समाज के मठ मंदिरों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। प्रयागराज द्वादश माधव के स्थानों को भी सुरक्षित किए जाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं पूरे संत समाज से आग्रह करता हूं कि विश्व हिन्दू परिषद हिंदू धर्म और संस्कृति के लिए जो कार्य कर रहा है उसमें वह अपने मठ और मंदिर छोड़कर उनके साथ निकले और उनके कार्यों में सहयोग प्रदान करे।

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री बागेश्वर धाम के साथ संत चट्टान की तरह खड़े हैं। जो भी हिंदू समाज के आस्था के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करेगा उस को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए संत समाज तैयार है। अगर हमने धर्मांतरण का विरोध नहीं किया तो हम मिटने के लिए तैयार रहें।

सतुआ बाबा ने कहा हिंदू समाज की एकता गांव गांव में सत्संग वेदों के प्रचार प्रसार के माध्यम से हो सकती है। भारत हिंदू राष्ट्र था, है और रहेगा। लव जिहाद दंड का प्रावधान हो जिसे संत तय करें।

जगद्गुरु रामानुजाचार्य विद्याचार्य वासुदेवाचार्य ने घोषणा की कि 10 पेजों की एक बुकलेट हिंदू परिवारों के संस्कार लव जिहाद धर्मांतरण पर रोक के विषय पर संत समाज तैयार कर उसे घर-घर संत समाज के माध्यम से पूरे भारत में पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। समलैंगिकता पर उन्होंने कहा यह संस्कार को समाप्त करने और हमारी संस्कृति से खिलवाड़ करने का कुचक्र रचा जा रहा है। संतों ने राम जन्मभूमि आंदोलन के जैसा धर्मांतरण के खिलाफ आंदोलन चलाने की एक स्वर में हुंकार भरी।

महामंडलेश्वर हरिहरानंद महाराज ने कहा लव जिहाद और धर्मांतरण की योजना हिंदू समाज को तोड़ने के लिए आसुरी शक्तियों द्वारा की जा रही है। हिंदू धर्म वैश्विक शांति की कामना करता है। पूरी दुनिया में अशांति फैलाने वाले लोग लोभ लालच और वैसे धर्मांतरण का कुचक्र आदिवासी वनवासी क्षेत्रों में अनुसूचित ग्रामों में रच रहे हैं। हम सनातन धर्म की रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। धर्म रक्षा ही हमारे जीवन का ध्येय होना चाहिए।

संतों ने एक स्वर में कहा घर वापसी जारी रहेगी। इसके लिए जो भी प्रयास करना होगा संत समाज करेगा। जब भी हिंदू समाज पर हिंदू संस्कृति और धर्म पर आक्रमण होगा संत समाज चट्टान की तरह खड़ा रहेगा।

संतों ने लाखों किलोमीटर की यात्रा करके श्री राम जन्मभूमि को मुक्त कराया। काशी और मथुरा को हम मुक्त करा कर ही मानेंगे। धर्मांतरण और लव जिहाद को बॉलीवुड के जरिए हिंदू समाज में जहर घोलने का कार्य कर रही है। हम अपने जाति मत पंथ संप्रदाय की एकता को विघटित नहीं होने देंगे। हम तोड़ने नहीं जोड़ने पर विश्वास रखते हैं। राष्ट्र धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए बलिदान की भी आवश्यकता पड़ी तो संत समाज बलिदान देने को तैयार रहेगा।

विद्या भास्कर महाराज ने कहा विश्व हिंदू परिषद अपनी स्थापना से आज तक सेवा, सुरक्षा और संस्कार निष्ठा के साथ पूरी दुनिया में सनातन संस्कृति के लिए कार्य कर रहा है।

प्रमुख रूप से राजकुमार दास, संतोष दास महाराज, ब्रह्म आश्रम महाराज, रामाश्रय महाराज, यमुनापुरी महाराज, देवेंद्र शास्त्री महाराज, शशिकांत दास महाराज, भूषण दास महाराज, राजकुमार दास महाराज के साथ महामंडलेश्वर हरिहरानंद ने घोषणा किया कि संत समाज गांव-गांव जाकर धर्मांतरण के खिलाफ जनजागरण करेगा। धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए महाभारत की भी आवश्यकता पड़ी तो हम इससे पीछे हटने वाले नहीं हैं। हिंदू समाज का स्वाभिमान को कोई चुनौती दे नहीं सकता हमारा इतिहास कहता है कि जब-जब विघटनकारी शक्तियां हिंदू समाज एवं संस्कृति को तोड़ने का प्रयास करेंगी तब तक हमारा इतिहास कहता है कि हम अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए शौर्य का प्रदर्शन करते हैं। धर्म की रक्षा एवं धर्म की स्थापना के लिए ही संत का जीवन होना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त

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