भारतीय समुद्री सीमा के पहरेदार डाइविंग सपोर्ट वेसल 'निस्तार' और 'निपुण' लॉन्च


भारतीय समुद्री सीमा के पहरेदार डाइविंग सपोर्ट वेसल 'निस्तार' और 'निपुण' लॉन्च

 
- नेवी वेलफेयर एंड वेलनेस एसोसिएशन की अध्यक्ष ने विशाखापत्तनम में किया जलावतरण

- नौसेना प्रमुख बोले, हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की ताकत बढ़ाएंगे दोनों खोजी जहाज

नई दिल्ली, 22 सितम्बर (हि.स.)। भारत की समुद्री सीमा के पहरेदार के रूप में दो डाइविंग सपोर्ट वेसल निस्तार और निपुण लॉन्च किए गए। इनका जलावतरण विशाखापत्तनम में नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार की मौजूदगी में नेवी वेलफेयर एंड वेलनेस एसोसिएशन (एनडब्ल्यूडब्ल्यूए) की अध्यक्ष श्रीमती कला हरि कुमार के हाथों किया गया। नौसेना प्रमुख ने कहा कि इन बहुमुखी जहाजों से न केवल हमारी खोज और बचाव क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इनकी विशिष्ट क्षमताएं हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना का ताकत बढ़ाएंगी।

एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि भारतीय नौसेना भारत की समुद्री शक्ति की प्रमुख अभिव्यक्ति है और भारत के राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा, संरक्षण और बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस दिशा में नौसेना विस्तृत क्षेत्रों में दुर्जेय विमान वाहक से लेकर छोटे गश्ती जहाजों तक की तैनाती करती है। आज लॉन्च किए गए डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) अद्वितीय प्लेटफॉर्म हैं जिन्हें विशेष गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव अभियान चलाने के लिए विकसित किया गया है। विशाखापत्तनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में बनाए गए दोनों सपोर्ट वेसल नौसेना की समुद्री क्षमता को बढ़ाएंगे।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में निर्माणाधीन 45 जहाजों और पनडुब्बियों में से 43 देश भर के शिपयार्ड में बनाए जा रहे हैं। डीएसवी परियोजना के लगभग 80% उपकरण पूरे भारत में 120 से अधिक एमएसएमई से स्वदेशी रूप से प्राप्त किए गए हैं। इन परिष्कृत और अपनी तरह के पहले प्लेटफार्मों की शुरुआत ने विशिष्ट प्लेटफार्मों को डिजाइन और निर्माण करने की क्षमता रखने वाले राष्ट्रों के एक विशिष्ट समूह में भारत की स्थिति को मजबूत किया है। यह 2047 तक नौसेना के 100% आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और कदम है, जिसका लक्ष्य हमने अपने लिए निर्धारित किया है।

एडमिरल ने कहा कि नौसेना में कमीशन होने के बाद निस्तार और निपुण न केवल हमारे गहरे समुद्र में गोताखोरी के संचालन में एक नए युग की शुरुआत करेंगे, बल्कि आईओआर में पनडुब्बी बचाव अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भारतीय नौसेना का कद भी बढ़ाएंगे। सबमरीन रेस्क्यू वेसल के रूप में अपने पिछले अवतार में आईएनएस निस्तार ने 1971 में युद्ध के दौरान पाकिस्तानी नौसेना की पनडुब्बी गाजी पर डाइविंग ऑपरेशन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

नौसेना प्रवक्ता विवेक मधवाल ने बताया कि डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) भारतीय नौसेना के लिए एचएसएल में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अपनी तरह के पहले जहाज हैं। जहाज 118.4 मीटर लंबे, 22.8 मीटर चौड़े हैं और इनका वजन 9,350 टन है। इन जहाजों को डीप सी डाइविंग ऑपरेशन के लिए तैनात किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) के साथ डीएसवी को आवश्यकता होने पर पनडुब्बी बचाव अभियान चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अलावा ये जहाज निरंतर गश्त करने, खोज और बचाव अभियान चलाने और उच्च समुद्र में हेलीकॉप्टर संचालन करने में सक्षम होंगे।

उन्होंने बताया कि इन पोत को गहरे समुद्र में गोते लगाने संबंधी अभियान में तैनात किया जाएगा। ये पोत सतत गश्त करने, तलाश एवं बचाव अभियान चलाने तथा ऊंची लहरों के दौरान हेलीकॉप्टर अभियानों के संचालन में सक्षम हैं। उनके अनुसार 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री वाली डीएसवी परियोजना ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अपार अवसर पैदा किए हैं। साथ ही इससे स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिला है जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम 

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