स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व का संगम हैं ग्रासरूट्स नवाचार : राष्ट्रपति

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स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व का संगम हैं ग्रासरूट्स नवाचार : राष्ट्रपति


नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत अपनी विशालता और नवाचार की भावना के बल पर ग्रासरूट्स (जमीनी स्तर के) नवाचारों की वैश्विक शक्ति बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार समाज की जरूरतों के अधिक अनुकूल होते हैं क्योंकि इनमें स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच, व्यक्तिगत सृजनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का समावेश होता है।

राष्ट्रपति ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अटल नवाचार मिशन (एआईएम) के ग्रासरूट्स इनोवेटर्स के एक समूह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने नवाचार प्रदर्शनी का अवलोकन किया और नवाचारकर्ताओं से बातचीत भी की।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह देखकर प्रसन्नता हुई कि देशभर के नवाचारकर्ता स्थानीय समस्याओं के ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं, जिनका महत्व राष्ट्रीय स्तर पर भी है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में अपशिष्ट से संपदा (वेस्ट टू वेल्थ), ऊर्जा संरक्षण, महिलाओं और दिव्यांगजनों की सुविधा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि तथा कला संरक्षण जैसे क्षेत्रों में विकसित नवाचार समाज के लिए उपयोगी हैं।

उन्होंने कहा कि वह स्वयं ग्रामीण पृष्ठभूमि से आती हैं और बचपन से उन्होंने देखा है कि गांवों के लोगों के पास व्यावहारिक ज्ञान का समृद्ध भंडार होता है। किसान अपने अनुभव से खेती में नए प्रयोग करते हैं, महिलाएं उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करती हैं और स्थानीय कारीगर सीमित साधनों से उपयोगी वस्तुएं तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि यही सोच नवाचार की वास्तविक नींव है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समाज में परिवर्तन केवल विचारों से नहीं आता, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए ऐसा वातावरण जरूरी है जो प्रतिभाओं को मार्गदर्शन, संसाधन और उचित मंच उपलब्ध कराए। उन्होंने अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटरों की सराहना करते हुए कहा कि ये केंद्र जमीनी स्तर के नवाचारकर्ताओं को तकनीकी सहायता देने और उनके विचारों को सफल उद्यम में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक समस्याओं का समाधान खोजने के लिए नवाचार की सोच के साथ काम करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि देश में नवाचार की संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है और इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा।

राष्ट्रपति ने नवाचारकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। उन्होंने उनसे अपने नवाचारों को लगातार बेहतर बनाने, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अन्य नवाचारकर्ताओं के साथ सहयोग बढ़ाने तथा उन्हें व्यापक स्तर तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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