वंशवाद की राजनीति से लोकतंत्र को खतरा पर आरएसएस करेगा संगोष्ठी

वंशवाद की राजनीति से लोकतंत्र को खतरा पर आरएसएस करेगा संगोष्ठीनई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में आरएसएस से जुड़े थिंक टैंक रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी (आरएमपी) लोकतांत्रिक शासन के लिए वंशवादी राजनीतिक दलों से खतरा पर सेमिनार आयोजित करने जा रही है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भाग लेंगे।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा 19 मई को एक दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे। नड्डा के अलावा, आरएमपी अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस, वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी के साथ-साथ गैर-वंशवादी दलों जद (यू), अन्नाद्रमुक और एजीपी के प्रतिनिधि भी इस विषय पर अपने विचार साझा करेंगे।

केंद्रीय मंत्री आर.सी.पी. सिंह संभवत: जद (यू) का प्रतिनिधित्व करेंगे और तांबी दुरई अन्नाद्रमुक का प्रतिनिधित्व करेंगे।

भाजपा राज्य सभा सदस्य, विनय सहस्रबुद्धे ने कहा, भारत में, 2,700 पंजीकृत और मान्यता प्राप्त दलों में से 50 प्रमुख राजनीतिक दलों में से कम से कम 4/5 वंशवाद आधारित हैं। यह घटना एक मतदाता के लिए उपलब्ध विकल्पों को गंभीरता से कम करती है क्योंकि यह प्रतिस्पर्धा के तत्व को प्रभावित करती है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के वंशवाद संचालित पार्टियों में मौजूदा तंत्र के तहत एक ही परिवार व्यावहारिक रूप से सब कुछ नियंत्रित करती है, पार्टी वित्त, पार्टी सदस्यता, उम्मीदवारी, गठबंधन और राजनीतिक भागीदारी के बारे में निर्णय भी यही लेते हैं। यह पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र के लिए मौत की घंटी का काम करता है।

उन्होंने कहा, एक पार्टी जो अपने नेताओं के बेटों और बेटियों को उम्मीदवारी दे रही है वह एक अलग बात है और एक परिवार का पार्टी पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करना अलग बात है। बाद वाला लोकतंत्र के लिए सबसे हानिकारक है। कोई भविष्यवाणी कर सकता है कि परिवार के अमुख बच्चा का तीन दशक बाद पार्टी अध्यक्ष बनना निश्चित है और यह गंभीर रूप से आपत्तिजनक है।

आरएमपी के महानिदेशक रवींद्र साठे ने कहा, विचार-विमर्श के अंत में विकसित सिफारिशें भारत के चुनाव आयोग को प्रस्तुत की जाएंगी।

--आईएएनएस

आरएचए/एसकेपी

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