युद्ध और संघर्ष के दौर में महात्मा गांधी का शांति व अहिंसा का संदेश अधिक प्रासंगिक : मुर्मु
नई दिल्ली, 01 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष का माहौल है और ऐसे समय में महात्मा गांधी का शांति एवं अहिंसा का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।
गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि वह देशवासियों की ओर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करती हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी के जीवन और आदर्शों का विश्व समुदाय व्यापक रूप से सम्मान करता है।
मुर्मु ने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष का वातावरण है, जिसका प्रभाव सभी देशों पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में महात्मा गांधी का शांति और अहिंसा का संदेश पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में सहानुभूति और समावेशिता के मूल्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कोई भी नागरिक विकास के लाभों से वंचित न रहे।
राष्ट्रपति ने कहा कि यह दृष्टिकोण महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ के आदर्श की भावना को दर्शाता है, जो सभी के कल्याण और उत्थान के सिद्धांत पर आधारित है।
उन्होंने गांधी जयंती के अवसर पर देशवासियों से नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सशक्त, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

