प्रचार-प्रसार के युग में समाज तक प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना अत्यंत आवश्यक : सुनील अम्बेकर

WhatsApp Channel Join Now
प्रचार-प्रसार के युग में समाज तक प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना अत्यंत आवश्यक : सुनील अम्बेकर


लखनऊ, 26 जुलाई (हि.स.)। वर्तमान सूचना एवं प्रचार-प्रसार के युग में समाज तक सही,तथ्यपरक एवं प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि तथ्य आधारित संवाद ही भ्रामक सूचनाओं एवं फॉल्स नैरेटिव से समाज को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अम्बेकर ने रविवार को बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की मीडिया कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कही।

श्री अम्बेकर ने मीडिया एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का आह्वान किया कि वे तथ्यों की पुष्टि के उपरांत ही सूचनाओं का प्रसार करें तथा सकारात्मक, उत्तरदायी और राष्ट्रहितकारी संवाद को बढ़ावा दें। भारतीयता के विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भारतीय दृष्टिकोण, भारतीय जीवन-मूल्यों एवं सांस्कृतिक विरासत को समुचित स्थान देना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीयता केवल विचारों तक सीमित न रहे,बल्कि उसे व्यवहार और जीवनशैली में भी आत्मसात किया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा की मूल अवधारणा को समझते हुए उसे बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक तकनीक एवं नवाचार से जोड़ने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने स्वदेशी सोच, भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रोन्मुखी शिक्षा को प्रोत्साहित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षकों, अभिभावकों और नई पीढ़ी के सामूहिक प्रयासों से ही मूल्यनिष्ठ, जागरूक एवं आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव है।

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.राज कुमार मित्तल ने कहा कि मीडिया आज समाज की चेतना,जनमत निर्माण और सूचना प्रसार का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। ऐसे में मीडिया से जुड़े विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए बदलती तकनीकों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मीडिया के नए स्वरूप को समझना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान युग तकनीक का युग है,लेकिन तकनीक का उपयोग विवेक, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ होना चाहिए।तथ्यपरक, निष्पक्ष और उत्तरदायी पत्रकारिता ही मीडिया की विश्वसनीयता की आधारशिला है। प्रो. मित्तल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीकें पत्रकारिता को अधिक प्रभावी बना सकती हैं, किंतु उनका उद्देश्यपूर्ण और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग होना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे स्वयं को निरंतर अद्यतन रखें, नई मीडिया तकनीकों में दक्षता प्राप्त करें तथा भारतीय ज्ञान परंपरा, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर जिम्मेदार एवं विश्वसनीय मीडिया के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।

इस अवसर पर इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश की अध्यक्षता में 'आधुनिक मीडिया परिदृश्य की गतिशीलता का परिचय तथा प्रभावी कंटेंट लेखन के बुनियादी सिद्धांत' विषय पर तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। प्रो. सुरेश ने अपने व्याख्यान में बदलते तकनीकी परिदृश्य के संदर्भ में 'बीफोर गूगल (BG)' और 'आफ्टर गूगल (AG)' के दौर की तुलना करते हुए बताया कि डिजिटल क्रांति ने सूचना के सृजन, प्रसार और उपभोग के तरीकों में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय

Share this story