परमार्थ निकेतन के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती को दिया जाएगा 2026 का विवेकानंद सेवा सम्मान

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परमार्थ निकेतन के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती को दिया जाएगा 2026 का विवेकानंद सेवा सम्मान


- 30 मई को कोलकाता में होगा सम्मान प्रदान समारोहकोलकाता, 25 मई (हि.स.)। कोलकाता महानगर की सुप्रसिद्ध साहित्यिक-सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा प्रवर्तित इस वर्ष का 40वां विवेकानन्द सेवा सम्मान' दिव्यांग मुक्त भारत अभियान के सूत्रधार, अध्यात्म के शिखर पुरुष, भारतीय संस्कृति एवं सनातन परम्परा के संवाहक तथा परमार्थ निकेतन (ऋषिकेश) के संस्थापक-अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को दिया जाएगा।

आगामी शनिवार को नेशनल लाइब्रोरी सभागार में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

कुमार सभा के अध्यक्ष महावीर बजाज ने बताया कि सांस्कृतिक-आध्यात्मिक चेतना के संवद्र्धन एवं मानवीय मूल्यबोध को जागृत करने में स्वामी जी के योगदान हेतु प्रदान उन्हें इस साल का विवेकानंद सेवा सम्मान देने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानंदजी सरस्वती (अध्यक्ष : परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश) दिव्यांग मुक्त भारत अभियान' के सूत्रधार हैं। उनके मार्गदर्शन में डिवाईन शक्ति फाउन्डेशन' एवं महावीर सेवा सदन' के संयुक्त सहयोग से इस सेवा का प्रारंभ वर्तमान में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में किया गया है।

महावीर बजाज ने बताया कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान परमार्थ निकेतन शिविर में इस अभियान के माध्यम से हजारों लोगों की सेवा की गई। मानवता एवं पर्यावरण के संरक्षण में समर्पित, संस्कृत एवं दर्शनशास्त्र के ज्ञाता, एकता सद्भाव के परमपोषक स्वामी चिदानंद सरस्वती जी को मात्र 8 वर्ष की अल्पायु में सद्गुरु की कृपा प्राप्त हुई। ईश्वर की महिमा का अंत:करण में एहसास होने पर उन्होंने युवावस्था में एक वर्ष मौन साधना के पश्चात् हिमालय में मौन एवं ध्यान साधना की। मात्र 12 वर्ष की आयु में कठोर साधना के उपरांत गुरु के आदेश पर शैक्षणिक ज्ञानार्जन हेतु जंगल से वापस लौटे एवं संस्कृत व दर्शनशास्त्र की शिक्षा के साथ अनेक भाषाओं में वैचारिक अभिव्यक्ति की क्षमता प्राप्त की। आध्यात्मिक धर्मगुरु स्वामीजी परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष; गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता; ग्लोबल इण्टर फेथ वाश एलायंस (जीवा) के सह-संस्थापक अध्यक्ष तथा भारतीय संस्कृति शोध प्रतिष्ठान के संस्थापक हैं।

उल्लेखनीय है कि कुमारसभा पुस्तकालय ने 1987 ई. में स्वामी विवेकानन्द की 125वीं जयन्ती के अवसर पर स्वामीजी के आदर्शों के अनुरूप समाजसेवा, संस्कार एवं सामाजिक पुनरुत्थान के लिए समर्पित व्यक्तियों/संस्थाओं हेतु इस वार्षिक सम्मान की शुरुआत की थी । प्रथम सम्मान नागालैंड की रानी गाइदिनल्यु को जबकि गत वर्ष का सम्मान पश्चिम बंगाल के स्वामी प्रदीप्तानन्द जी ऊर्फ (कार्तिक महाराज) को समर्पित किया गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष मधुप

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