नेताजी जयंती पर 'सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026' की घोषणा

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नई दिल्ली, 23 जनवरी (हि.स.)। केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर वर्ष 2026 के 'सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार' के विजेताओं की घोषणा की।

गृह मंत्रालय की जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, इस वर्ष संस्थागत श्रेणी में 'सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (एसएसडीएमए) और व्यक्तिगत श्रेणी में भारतीय सेना की 'लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के' को आपदा प्रबंधन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए चुना गया है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्थापित यह पुरस्कार आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में निस्वार्थ सेवा और अमूल्य योगदान देने वाले व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित करने के लिए हर साल दिया जाता है।

भारतीय सेना की 'कोर ऑफ इंजीनियर्स' की अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के ने 2024 में केरल के वायनाड में आए भूस्खलन के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने फंसे लोगों को तेजी से निकालने, राहत सामग्री बांटने और ज़रूरी सेवाओं की बहाली के लिए सिविल प्रशासन और स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय किया। उनका नेतृत्व उनके साहस और नवाचार की मिसाल को दर्शाता है। उनके सुपरविज़न में चूरलमाला में 190 फुट लंबे बेली ब्रिज का तेजी से निर्माण किया गया, जिससे दूरदराज के गांवों तक कनेक्टिविटी बहाल की जा सकी। उन्होंने कोमात्सु एक्सकेवेटर का उपयोग कर रात के अंधेरे में महज 4 घंटे के भीतर अस्थायी फुटब्रिज बनाकर सैकड़ों लोगों की जान बचाई। शेल्के ने 2,300 से अधिक कर्मियों को आपदा प्रतिक्रिया का प्रशिक्षण देकर भविष्य की आपदाओं के लिए एक कुशल टीम तैयार की है।

एसएसडीएमए ने हिमालयी क्षेत्र में आपदा न्यूनीकरण का एक स्थायी मॉडल पेश किया है। एसएसडीएमए ने 1,185 प्रशिक्षित 'आपदा मित्रों' को गांव से लेकर जिला स्तर तक तैनात किया है, जिससे पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन समितियां मजबूत हुई हैं।व इसके अलावा, 2016 के मंतम भूस्खलन और 2023 की तीस्ता बाढ़ के दौरान एसएसडीएमए की तत्काल कार्रवाई से 2,563 लोगों की जान बचाई गई। इनका समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण अब अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए एक प्रेरणा बन गया है।

इस वर्ष के पुरस्कार के लिए मई 2025 से नामांकन प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें देशभर से कुल 271 नामांकन प्राप्त हुए। यह पुरस्कार न केवल विजेताओं के साहस को सलाम करता है, बल्कि देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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