पश्चिम एशिया के लिए चला अमेरिकी विमान वाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश हिंद महासागर में पहुंचा

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वाशिंगटन 24 अप्रैल (हि.स.) अमेरिका ने पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान के साथ जारी संघर्ष में अपना तीसरा विशाल विमानवाहक पोत मोर्चे पर भेज दिया है। अमेरिकी नौसना का निमित्ज श्रेणी का विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश (सीवीएन 77) हिंद महासागर पहुंच गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 'एक्स' पर इसकी पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि परमाणु ऊर्जा से चालित निमित्ज श्रेणी का विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश (सीवीएन 77) 23 अप्रैल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अधिकार वाले क्षेत्र में हिंद महासागर में आ गया है। एक अन्य पोस्ट में जानकारी दी गई है कि यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन 72) पर सवार नाविक क्रू सदस्यों को खाना परोसा जा रहा है। इस समय पश्चिम एशिया में तीन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप काम कर रहे हैं।

निमित्ज श्रेणी में अमेरिकी नौसेना के 10 परमाणु संचालित विमानवाहक पोत शामिल हैं। इनकी तुलना दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों के रूप में होती है। 1975 से 2009 के बीच निर्मित ये जहाज अमेरिकी सैन्य शक्ति और समुद्री प्रभुत्व का प्रमुख प्रतीक माने जाते हैं। ये जहाज दो परमाणु रिएक्टरों से संचालित होते हैं। इसके कारण इन्हें ईंधन भरने के लिए रुकने की आवश्यकता नहीं होती। ये लगातार 20 वर्ष तक परिचालन कर सकते हैं। लगभग 1092 फुट लंबाई वाले इस श्रेणी के जहाजों का वजन लगभग 1,00,000 टन होता है। निमित्ज श्रेणी का पोत अपने साथ 64 से 80 विमान ले जा सकता है। इसमें लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर शामिल होते हैं। यही नहीं एक जहाज पर लगभग 6,000 से अधिक कर्मचारी (चालक दल और विमान कर्मी) तैनात हैं। इनकी यह खूबी इन्हें एक तैरते हुए शहर जैसा बनाती है।

इस श्रेणी के कुल 10 जहाज हैं। इस श्रेमी के पहले जहाज (सीवीएन-68) को 1975 में कमीशन किया गया था। यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश इस श्रेणी का दसवां और अंतिम जहाज है। इन विमानवाहक पोतों का नाम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी नौसेना के कमांडर इन चीफ एडमिरल चेस्टर डब्ल्यू निमित्ज के सम्मान में रखा गया है। अमेरिकी नौसेना धीरे-धीरे इन्हें नई फोर्ड श्रेणी के जहाजों से बदल रही है।

अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स नेवल इंस्टीट्यूट के ऑनलाइन समाचार और विश्लेषण करने वाले पोर्टल यूएसएनआई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यूएसएस अब्राहम लिंकन अरब सागर में पहले से तैनात है। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड लाल सागर क्षेत्र में मोर्चा संभाले हुए है और यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू. बुश अब हिंद महासागर पहुंच चुका है। यूएसएस बुश ने अफ्रीका के दक्षिणी सिरे (केप ऑफ गुड होप) के रास्ते लंबा सफर तय किया है। वह लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से बचकर यहां पहुंचा है। लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में हूती विद्रोहियों से खतरा हो सकता था। युद्धपोत बुश की तैनाती ईरान के साथ चल रहे तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा और क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाओं के बीच हुई है।

तीन विमान वाहक युद्धपोतों का एक साथ तैनात होना अमेरिकी नौसेना के लिए एक असाधारण और शक्तिशाली संकेत माना जा रहा है। इससे हवाई हमलों, समुद्री नाकाबंदी और निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ गई है। अमेरिकी रक्षा अधिकारी इस तैनाती को क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई के लिए बता रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र में ईरान और उसके समर्थक समूहों के साथ तनाव अभी भी बना हुआ है। इससे पश्चिम एशिया में फिर से बड़े पैमाने पर संघर्ष भड़कने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम क्षेत्र में ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

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