युद्धविराम की शर्त पर विश्व के 6 देशाें ने की होर्मुज संकट पर मदद की पेशकश

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युद्धविराम की शर्त पर विश्व के 6 देशाें ने की होर्मुज संकट पर मदद की पेशकश


ब्रुसेल्स, 20 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में करीब तीन हफ्ताें से जारी युद्ध के बीच बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में गुरुवार को हुई यूरोपीय शिखर बैठक के बाद ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड ने कहा है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में योगदान देने काे तैयार हैं। हालांकि इटली, जर्मनी और फ्रांस ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की ठोस पहल केवल युद्धविराम के बाद ही संभव होगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से सामान्य समय में वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) का लगभग 20% गुजरता है। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल टकराव से यहां स्थिति बेहद गंभीर हो गई है।

द ऑस्ट्रेलियन सहित विभिन्न मीडिया रिपाेर्टस के अनुसार, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड ने गुरुवार को कहा कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार हैं। इस समूह ने कहा कि वे उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो प्रारंभिक योजना बनाने में लगे हुए हैं। साथ ही उन्होंने खाड़ी में निहत्थे वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा हाल ही में किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।

हालांकि इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में यह स्पष्ट कर दिया कि वे किसी तत्काल सैन्य मदद की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि युद्धविराम के बाद एक संभावित बहुपक्षीय पहल की बात कर रहे हैं।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब जलडमरूमध्य पर ईरान की प्रभावी नाकेबंदी ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होने वाली वाणिज्यिक शिपिंग को ठप कर दिया है। शांति के समय में इस मार्ग से दुनिया के कच्चे तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है।

28 फरवरी को यह युद्ध तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बमबारी शुरू की, जिसके जवाब में तेहरान ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में हमले किए।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, इस स्थिति के कारण जलडमरूमध्य के पश्चिम में लगभग 3,200 जहाजों पर सवार लगभग 20,000 नाविक फंसे हुए हैं। इस बीच 10 टैंकरों सहित 23 वाणिज्यिक जहाजों ने घटनाओं की सूचना दी है या बताया कि उन पर हमला हुआ है।

सहयोगी देशों के संयुक्त बयान में कहा गया कि हम बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। साथ ही कहा कि हम ईरान से आह्वान करते हैं कि वह अपनी धमकियों, बारूदी सुरंगें बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा वाणिज्यिक जहाजों के लिए जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने के अन्य प्रयासों को तत्काल बंद करे।

इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा कि छह देशों के इस बयान को जंगी मिशन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना किसी युद्धविराम और एक बड़े पैमाने पर बहुपक्षीय पहल के होर्मुज़ में कोई एंट्री नहीं होगी और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र का कानूनी ढांचा मुहैया कराना सही और उचित होगा।

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि जर्मन सेना की किसी भी तरह की भागीदारी युद्धविराम के बाद की स्थिति पर निर्भर करेगी और इस बात पर भी कि क्या हम किसी अंतरराष्ट्रीय आदेश के तहत इसमें हिस्सा ले पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि सेना की भागीदारी के लिए जर्मनी की संसद की मंजूरी भी जरूरी होगी।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पत्रकारों से कहा कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के स्थायी सदस्यों से इस बारे में बात करने की योजना बना रहा है कि भविष्य की योजनाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र का कोई ढांचा बनाया जा सकता है या नहीं। यह तब होगा जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य में चल रही गोलीबारी बंद हो जाएगी, ताकि वहां जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके। हमने एक शुरुआती प्रक्रिया शुरू की है और आने वाले दिनों में हम देखेंगे कि क्या इसके सफल होने की कोई गुंजाइश है।

ब्रिटेन के एक रक्षा अधिकारी ने बीते बुधवार को पत्रकारों से कहा था कि खतरे का स्तर इतना ज़्यादा है कि मुझे नहीं लगता कि अभी कई देश अपने जंगी जहाज़ों को इस खतरे के बीच में भेजने को तैयार होंगे। साथ ही कहा कि, लंदन ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड में अतिरिक्त सैन्य प्लानर्स की छोटी संख्या भेजी है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में आगे जो भी हालात बनते हैं, उनके लिए प्लानिंग और विकल्पों को तैयार करने में मदद मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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