ऑस्ट्रिया किसी भी सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं बनेगा : उप-चांसलर

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ऑस्ट्रिया किसी भी सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं बनेगा : उप-चांसलर


ऑस्ट्रिया किसी भी सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं बनेगा : उप-चांसलर


वियना, 05 अप्रैल (हि.स.)। ऑस्ट्रिया के उप-चांसलर आंद्रेयास बाबलेर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अराजक नीति' की आलोचना करते हुए कहा कि ऑस्ट्रिया न तो किसी सैन्य टकराव का हिस्सा बनेगा और न ही अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग बिना सख्त जांच के होने देगा। साथ ही उन्हाेंने अमेरिका की मौजूदा विदेश नीति से दूरी बनाते हुए स्पष्ट किया है कि उनका देश अपनी ऐतिहासिक तटस्थता से कोई समझौता नहीं करेगा।

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच एक माह से जारी युद्ध और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के भीतर उभरते मतभेदों के बीच वियना का यह रुख यूरोप में रणनीतिक असहमति और बदलते वैश्विक समीकरणों की ओर इशारा करता है।

तुर्किए की सरकारी समाचार संस्था अनाडाेलू एजेंसी (एए) के अनुसार ऑस्ट्रिया के उप चांसलर ने ज़ोर देकर कहा कि उनका देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अराजक नीति का हिस्सा नहीं हैं और इस मामले में हमें एक इंच भी पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि वियना की तटस्थता गैर-समझौता योग्य है और एक ऐसा सिद्धांत जो अमेरिकी सैन्य विमानों की उड़ान पर भी लागू होता है।

एंड्रियास बैबलर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि ऑस्ट्रियाई हवाई क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य विमानों की उड़ानों को देखते हुए एक स्पष्ट सीमा तय करना जरूरी है। हमारी तटस्थता गैर-समझौता योग्य है और इसे लगातार बनाए रखा जाना चाहिए, वह भी अभी। उन्होंने कहा कि ऐसी उड़ानों के मामले में, यहां तक कि वे मिशन भी जो सीधे तौर पर संघर्ष क्षेत्रों में प्रवेश नहीं करते, बल्कि सैन्य कार्रवाइयों में सहायता करते हैं, उनकी भी गहन जाँच होनी चाहिए।

ऑस्ट्रिया 1955 से ही तटस्थता की एक पुरानी नीति का पालन करता आ रहा है, जिसके तहत वह किसी भी सैन्य गठबंधन में शामिल होने या अपनी धरती पर विदेशी सैन्य अड्डे बनाने की अनुमति नहीं देता है।

ये टिप्पणियां ईरान के साथ अमेरिका-इज़रायल युद्ध के दूसरे महीने में सामने आईं। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक 1,340 से ज़्यादा लोगाें की माैत हुई हैं, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई भी शामिल हैं। ईरान ने इसके जवाब में ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिनमें इज़रायल, जॉर्डन, इराक और उन खाड़ी देशों को निशाना बनाया गया है जहाँ अमेरिकी सेनाएँ तैनात हैं।

हालांकि, डाेनाल्ड ट्रंप ने यूरोप में अपने नाटो सहयोगियों से होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए नौसेना बल भेजने का आग्रह किया है, लेकिन कई प्रमुख सदस्यों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। उन्होंने ऐसा करके रणनीतिक मतभेदों और इस गठबंधन के उद्देश्य को लेकर चल रही बहस को उजागर किया है। इन सहयोगियों ने यह भी बताया है कि ट्रंप ने नाटो सहयोगियों से बिना किसी परामर्श के ही इस युद्ध की शुरुआत कर दी थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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