ईरान के नए विधेयक से चिंतित संयुक्त राष्ट्र, 30 साल तक की सजा को बताया स्वतंत्रता के लिए खतरा

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जिनेवा, 03 सितंबर (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार जांचकर्ताओं ने ईरान से उस प्रस्तावित कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की है, जिसमें विदेशी व्यक्तियों या संगठनों से संपर्क रखने पर दोषी पाए जाने वालों को 30 साल तक की जेल की सजा दिए जाने का प्रावधान है। संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को मौलिक स्वतंत्रताओं के लिए गंभीर खतरा बताया है।

ईरान पर गठित संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तथ्य-खोज मिशन ने गुरुवार को जारी बयान में प्रस्तावित कानून को लेकर कड़ी चिंता जताई। मिशन ने कहा कि वह ईरानी संसद में विचाराधीन इस विधेयक से बेहद चिंतित है और इसे नागरिक स्वतंत्रताओं पर बढ़ते दबाव का संकेत माना है।

जांचकर्ताओं के अनुसार, यदि यह कानून लागू होता है तो विदेशी लोगों और संस्थाओं के साथ सामान्य संवाद या संपर्क भी गंभीर कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी कि इससे ईरानी नागरिकों का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संपर्क सीमित होगा और देश में अभिव्यक्ति तथा अन्य बुनियादी स्वतंत्रताओं पर और अंकुश लग सकता है।

मिशन ने ईरानी अधिकारियों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का सम्मान करने और प्रस्तावित कानून को वापस लेने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से विचार साझा करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ संवाद करने के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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