यूके बॉयोबैंक के पांच लाख वॉलंटियर्स का गोपनीय डेटा लीक, चीन में अलीबाबा के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आया नजर
लंदन, 24 अप्रैल (हि.स.)। यूके बॉयोबैंक को इस समय डेटा गोपनीयता को लेकर चिंता का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने गुरुवार को इस बात की पुष्टि की कि पांच लाख वॉलंटियर्स का गोपनीय स्वास्थ्य रिकॉर्ड चीन की वेबसाइट अलीबाबा पर नजर आया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि इतने जरूरी मेडिकल रिकॉर्ड को कैसे सुरक्षित रखा जाता है। ब्रिटने के टेक्नोलॉजी मंत्री इयान मरे ने कहा कि यूके बॉयोबैंक चैरिटी ने सरकार को बताया कि प्रतिभागियों का 'पहचान-रहित' डेटा 'चीन में अलीबाबा के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कई लोगों ने बिक्री के लिए पहुंचाया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चीन की सरकार और अलीबाबा के सहयोग से डेटा को हटा दिया गया है और ऐसा माना जाता है कि डेटा की कोई बिक्री नहीं हुई है।
ब्रिटेन के इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 2003 में स्थापित यूके बॉयोबैंक दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य अनुसंधान प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसमें लगभग पांच लाख वॉलंटियर्स का जैविक और मेडिकल डेटा मौजूद है। इन सबने वैज्ञानिक अध्ययनों में सहयोग करने की सहमति दी थी। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार 2006 एवं 2010 के बीच इस प्रोजेक्ट ने 40 से 69 वर्ष की आयु के पांच लाख प्रतिभागियों को शामिल किया। इन प्रतिभागियों ने अपना जेनेटिक डेटा, क्लिनिकल माप, स्वास्थ्य जानकारी, जैविक नमूने और जीवनशैली से जुड़ा डेटा देने की सहमति दी।
यूके बॉयोबैंक मेडिकल अनुसंधान के लिए एक प्रमुख वैश्विक संसाधन है। वैज्ञानिक इसका उपयोग कैंसर, हृदय रोग और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का अध्ययन करने के लिए करते हैं और यह समझने की कोशिश करते हैं कि जेनेटिक्स और जीवनशैली किस तरह लंबे समय के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इसके महत्व को देखते हुए इस तक पहुंच को बहुत सख्ती से नियंत्रित किया जाता है और केवल स्वीकृत शोधकर्ताओं को ही कड़ी शर्तों के तहत इसकी अनुमति दी जाती है।
मरे ने कहा कि लीक हुआ डेटा 'डी-आइडेंटिफाइड' था। इसका मतलब है कि इसमें नाम और पते शामिल नहीं थे। फिर भी इसमें स्वास्थ्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी थी, जैसे कि उम्र और लिंग, जन्म की अवधि की जानकारी, मेडिकल स्थितियां और टेस्ट के नतीजे, जेनेटिक और बायोलॉजिकल डेटा, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारक। मरे ने इस उल्लंघन को 'अस्वीकार्य दुरुपयोग' बताया। उन्होंने कहा कि यह जानने के लिए जांच चल रही है कि आखिर यह कैसे हुआ।
बॉयोबैंक के मुख्य कार्यकारी रोरी कॉलिन्स ने प्रतिभागियों से माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे। मरे के अनुसार तीन शोध संस्थान इस लीक के लिए जिम्मेदार हैं। इन संस्थानों के पास वैज्ञानिक अध्ययनों के लिए डेटा तक पहुंच की बॉयोबैंक से अनुमति थी। इन संस्थानों ने डेटा शेयरिंग के कड़े नियमों का उल्लंघन किया। इन संस्थानों को पहुंच को रोक दिया गया है। मरे ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस घटना को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही शोध अध्ययनों से प्राप्त डेटा को प्रबंधित करने के तरीके पर नए दिशा-निर्देश जारी करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

