ईरान युद्ध बढ़ने से खाड़ी में सैकड़ों जहाजों ने डाला लंगर, स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर बढ़ी चिंता

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ईरान युद्ध बढ़ने से खाड़ी में सैकड़ों जहाजों ने डाला लंगर, स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर बढ़ी चिंता


लंदन, 01 मार्च (हि.स.)। ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के तेज होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हो गई हैं। जहाज-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार कम से कम 150 तेल टैंकर—जिनमें कच्चा तेल और एलएनजी ले जाने वाले पोत शामिल हैं— स्ट्रेट ऑफ होरमुज (होरमुज जलडमरूमध्य) से आगे खुले समुद्री क्षेत्र में लंगर डाले खड़े हैं।

जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके चलते कई जहाज प्रमुख तेल उत्पादक देशों सऊदी अरब और कतर के तटों के पास खुले समुद्र में रुके हुए हैं। कतर दुनिया के प्रमुख एलएनजी निर्यातकों में से एक है।

जहाज-निगरानी मंच समुद्री यातायात (MarineTraffic) के आंकड़ों के आधार पर अनुमान है कि कई पोत कुवैत और यूएई के विशेष आर्थिक क्षेत्रों (ईईजेड) के भीतर स्थिर खड़े हैं। ईईजेड आमतौर पर तटीय सीमा से 12 समुद्री मील आगे बढ़कर लगभग 39 किलोमीटर या उससे अधिक तक फैला होता है।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका

वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होरमुड से होकर गुजरता है। इसमें सऊदी अरब, यूएई, इराक, कुवैत और ईरान का तेल शामिल है। इसके अलावा कतर से बड़ी मात्रा में एलएनजी निर्यात भी इसी मार्ग से होता है।

आंकड़ों के अनुसार जलडमरूमध्य के बाहर यूएई और ओमान के तटों के पास भी करीब 100 टैंकर लंगर डाले हुए हैं। कई कार्गो जहाज भी अलग-अलग विशेष आर्थिक क्षेत्रों में रुके हुए हैं।

नौवहन पर अनिश्चितता

सूत्रों के मुताबिक, कई टैंकर मालिकों और ऊर्जा कंपनियों ने हमलों के बाद होरमुज मार्ग से कच्चे तेल, ईंधन और एलएनजी की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी है। ईरान की ओर से नेविगेशन बंद करने का दावा भी सामने आया है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरणों द्वारा औपचारिक निलंबन की पुष्टि नहीं की गई है।

अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व वाले संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र ने बयान में कहा है कि समुद्री क्षेत्र में नौसैनिक मौजूदगी बढ़ सकती है, सुरक्षा उपाय कड़े हो सकते हैं और जलडमरूमध्य के बाहर लंगर क्षेत्रों में भीड़भाड़ की स्थिति बन सकती है। बीमा बाजार में भी अस्थिरता की आशंका जताई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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