2036 के बाद न्यूक्लियर सिस्टम से संचालित अंतरिक्ष यान लॉन्च करेगा रूस, चंद्रमा-क्षुद्रग्रहों के संसाधनों पर भी नजर

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2036 के बाद न्यूक्लियर सिस्टम से संचालित अंतरिक्ष यान लॉन्च करेगा रूस, चंद्रमा-क्षुद्रग्रहों के संसाधनों पर भी नजर


मॉस्को, 26 जून (हि.स./रिया नोवोस्ती)। रूस की सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने वर्ष 2036 के बाद न्यूक्लियर सिस्टम से संचालित अंतरिक्ष यानों के निर्माण और उनकी उड़ानें शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव अंतरिक्ष गतिविधियों से संबंधित सरकारी नीति के आधारों पर तैयार राष्ट्रपति के मसौदा आदेश में शामिल किया गया है, जिसे शुक्रवार को नियामक कानूनी मसौदों के लिए बनाए गए सरकारी पोर्टल पर प्रकाशित किया गया।

मसौदा दस्तावेज के अनुसार, रूस की अंतरिक्ष नीति का मुख्य उद्देश्य उन परियोजनाओं पर संसाधनों को केंद्रित करना होगा, जो देश की तकनीकी नेतृत्व क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक दक्षता और दीर्घकालिक विकास को मजबूत करें। इसी रणनीति के तहत 2036 के बाद न्यूक्लियर सिस्टम का उपयोग करने वाले अंतरिक्ष यानों का विकास और उन्हें बाहरी अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने की योजना प्रस्तावित की गई है।

दस्तावेज में कहा गया है कि भविष्य की अंतरिक्ष परियोजनाओं में उन्नत परमाणु ऊर्जा प्रणालियों का उपयोग लंबी दूरी के मिशनों को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके जरिए गहरे अंतरिक्ष अभियानों में रूस की तकनीकी क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

रोस्कोस्मोस ने अपने प्रस्ताव में वर्ष 2036 के बाद चंद्रमा और क्षुद्रग्रहों पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों की खोज और उनके संभावित दोहन की दिशा में भी कार्य शुरू करने की योजना शामिल की है। एजेंसी का मानना है कि अंतरिक्ष संसाधनों के उपयोग से भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ आर्थिक संभावनाओं का भी विस्तार होगा।

प्रस्तावित नीति के तहत रूस दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों, नई प्रौद्योगिकियों के विकास और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में अपनी वैश्विक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहता है। हालांकि, यह फिलहाल राष्ट्रपति के मसौदा आदेश का हिस्सा है और अंतिम स्वीकृति के बाद ही इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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