रूसी तेल खरीद पर प्रतिबंध से यूक्रेन संकट हल नहीं होगा : एस. जयशंकर
कीव, 04 सितंबर (हि.स.)। भारत ने रूसी तेल की खरीद को लेकर अपनी नीति का बचाव करते हुए साफ़ कहा है कि ऊर्जा व्यापार पर प्रतिबंध लगाने से यूक्रेन संकट का समाधान नहीं होगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन विवाद का हल केवल बातचीत, कूटनीति और राजनीतिक संवाद के जरिए ही निकाला जा सकता है।
रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) के मुताबिक, यूक्रेन की राजधानी कीव में अपने यूक्रेनी समकक्ष आंद्री सिबिहा के साथ बातचीत के बाद प्रेस से बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह संघर्ष अपने पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है और केवल इस आधार पर इसका समाधान नहीं हो सकता कि कोई देश रूस से तेल, खनिज, धातु या अन्य वस्तुएं खरीद रहा है या नहीं।
जब जयशंकर से पूछा गया कि अगर अमेरिका रूस के प्रमुख तेल खरीदारों पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाता है तो क्या भारत रूसी तेल की खरीद कम करेगा, उन्होंने भारत की विशाल ऊर्जा जरूरतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं और भारत के सामने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी है।
ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रहा। रूस से भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 45 फीसदी, यानी लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन, आया। हालांकि, यह जुलाई के करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड आयात से कम था।
जयशंकर ने कहा कि भारत यूक्रेन के रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर नजरिए का सम्मान करता है लेकिन नई दिल्ली भी उम्मीद करती है कि उसके स्वतंत्र ऊर्जा और विदेश नीति संबंधी फैसलों का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत युद्ध के मैदान से समाधान निकलने की उम्मीद नहीं करता। उनके मुताबिक, संघर्ष जितना लंबा चलेगा, उतनी ही अधिक मौतें और तबाही होगी।
जयशंकर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका में ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर चर्चा होनी बाकी है। यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से पारित हो चुका है और रूस के प्रमुख तेल एवं गैस खरीदारों पर कड़े आर्थिक दबाव का रास्ता खोल सकता है। प्रस्तावित कानून के तहत रूस के शीर्ष पांच तेल खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान है। यूक्रेन इस विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित कराने के लिए समर्थन जुटा रहा है।
जयशंकर ने कहा कि भारत, रूस और यूक्रेन के बीच शांति के लिए आगे का रास्ता तलाशने में दोनों पक्षों की मदद करने को तैयार है। नई दिल्ली लगातार मॉस्को और कीव, दोनों के संपर्क में है।
गाैरतलब है कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान मोदी ने कहा था कि दुनिया को “अंतहीन युद्ध” से आगे बढ़कर युद्ध समाप्त करने की दिशा में काम करना चाहिए। दोनों नेताओं की अगले सप्ताह नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान फिर से मुलाकात होने की संभावना जताई जा रही है।
जयशंकर की कीव यात्रा किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली विशेष द्विपक्षीय यात्रा है। उनकी यात्रा को भारत की उस नीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें भारत, रूस के साथ अपने रणनीतिक और ऊर्जा संबंध बनाए रखते हुए यूक्रेन संकट के कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

