नेपाल : सत्तारूढ़ दलों की आलोचना के बीच प्रधानमंत्री प्रचण्ड को मिला विश्वास मत



काठमांडू, 13 मार्च (हि.स.)। प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने मंगलवार को संसद में विश्वासमत हासिल कर लिया। कुल 268 सांसदों की मौजूदगी में प्रचण्ड के गठबंधन को 157 वोट मिले। सरकार बचाने के लिए 138 वोट चाहिए थे। विरोध में 110 वोट पड़े। एक सदस्य ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

विश्वास मत के दौरान हुई चर्चा में सरकार को समर्थन कर रहे और सत्ता में सहभागी रहे अधिकांश दलों ने प्रधानमंत्री के अस्थिर चरित्र और बार बार गठबन्धन बदलने की प्रवृत्ति की आलोचना की। किसी ने प्रचण्ड की तुलना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की तो किसी ने उन्हें सत्ता में टिके रहने के लिए किसी भी तरह का अप्रिय निर्णय लेने का आरोप लगाया। सरकार को समर्थन दे रहे और सरकार में सहभागी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, जनता समाजवादी पार्टी, एकीकृत समाजवादी तथा नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के तरफ से बोलने वाले सांसदों ने प्रधानमंत्री प्रचण्ड की आलोचना की।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के तरफ से पार्टी के उपाध्यक्ष स्वर्णिम वाग्ले ने कहा कि काम का अनुभव लेने के लिए और कुछ कर दिखाने के लिए ही हम सरकार में तो शामिल हुए हैं लेकिन जनता के कामों की डिलवरी नहीं हो पाई तो सरकार का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। वाग्ले ने कहा कि राजनीति और सत्ता एक शतरंज की बिसात की तरह है, जिस पर अपनी चाल चलना जरूरी है। आज इस शतरंज की खेल में अगर हमने प्रधानमंत्री प्रचण्ड का साथ दिया भी है तो कल चेक मेट करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

सत्ता पक्ष जनता समाजवादी पार्टी के सांसद राजकिशोर यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री प्रचण्ड की अस्थिर राजनीति का खमियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता गठबन्धन का साथ छोड़ने पर प्रधानमंत्री बदलता है परन्तु यहां तो प्रधानमंत्री ही हर 6-6 महीने में गठबन्धन बदलकर अपनी सत्ता टिकाए रखना चाहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री प्रचण्ड की तुलना भारत के बिहार राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की और कहा कि जिस तरह से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को पलटूराम कहा जाता है, ठीक उसी तरह प्रधानमंत्री प्रचण्ड उनसे भी बड़े पलटूराम हो गए हैं।

इसी तरह एक अन्य सत्तारूढ़ दल एकीकृत समाजवादी के सांसद राजेन्द्र पाण्डे ने कहा कि विष का घूंट पीकर प्रधानमंत्री को समर्थन करना पड़ रहा है। जिस तरह से प्रचण्ड बार बार धोखेबाज साबित हो रहे हैं उसी तरह किसी दिन उन्हें भी धोखा मिलने वाला है। सरकार को समर्थन देना पार्टी की मजबूरी बताते हुए पाण्डे ने कहा कि कभी कांग्रेस को तो कभी एमाले को धोखा दे रहे हैं लेकिन किसी दिन अगर कांग्रेस और एमाले दोनों ही मिल गए तो प्रचण्ड की हालत क्या होगी?

प्रधानमंत्री प्रचण्ड ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि मैं चाहता हूं कि देउवा और ओली दोनों मिल जाएं और दोनों ही मिल कर सरकार चलाएं। उन्होंने कहा कि मैं इस बात से डरता नहीं हूं। ऐसी स्थिति आने पर मैं विपक्ष में बैठने के लिए तैयार हूं। अपने आप को धोखेबाज कहने पर प्रधानमंत्री प्रचण्ड ने कहा कि मैंने किसी को धोखा नहीं दिया है। मुझे जब जो ठीक लगा, मैंने वो कदम उठाया है।

हिन्दुस्थान समाचार/ पंकज/दधिबल

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