प्रधानमंत्री मोदी कॉप-28 में हिस्सा लेकर दुबई से स्वदेश लौटे, राष्ट्रपति नाहयान से कहा-अगले माह आइए गुजरात

प्रधानमंत्री मोदी कॉप-28 में हिस्सा लेकर दुबई से स्वदेश लौटे, राष्ट्रपति नाहयान से कहा-अगले माह आइए गुजरात
प्रधानमंत्री मोदी कॉप-28 में हिस्सा लेकर दुबई से स्वदेश लौटे, राष्ट्रपति नाहयान से कहा-अगले माह आइए गुजरात


प्रधानमंत्री मोदी कॉप-28 में हिस्सा लेकर दुबई से स्वदेश लौटे, राष्ट्रपति नाहयान से कहा-अगले माह आइए गुजरात


दुबई, 02 दिसंबर (हि.स.)। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज (कॉप)-28 (सीओपी-28) में हिस्सा लेकर शुक्रवार रात स्वदेश लौट गए। प्रधानमंत्री मोदी ने दुबई यात्रा के दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन की बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के मौके पर यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी मुलाकात की। उन्हें अगले महीने भारत में होने वाले वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री मोदी की इस दौरान इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से भी मुलाकात हुई। मेलोनी ने उनके के साथ सेल्फी ली और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि हम अच्छे दोस्त हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेलोनी के अलावा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, ब्राजील के प्रधानमंत्री लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड कैमरन, पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर से भी मुलाकात की।

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के चार सत्रों को संबोधित किया। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक की। प्रधानमंत्री ने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत की पहल और प्रगति पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री मोदी ने जी20 अध्यक्षता के दौरान भारत का समर्थन करने के लिए गुटेरेस को धन्यवाद दिया। गुटेरस ने पर्यावरण को लेकर भारत के प्रयासों की सराहना की। गुटेरेस ने प्रधानमंत्री की ग्रीन क्रेडिट पहल का भी स्वागत किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व नेताओं से आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए ग्रीन क्रेटिट्स इनिशिएटिव में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कार्बन क्रेडिट की अवधारणा वाणिज्यिक लाभ से प्रभावित है। इसमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का अभाव है।

हिन्दुस्थान समाचार/मुकुंद

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