पाकिस्तान में पीटीआई के 27 सितंबर के मार्च से डरी सरकार, इस्लामाबाद को बदला जा रहा है छावनी में

WhatsApp Channel Join Now
पाकिस्तान में पीटीआई के 27 सितंबर के मार्च से डरी सरकार, इस्लामाबाद को बदला जा रहा है छावनी में


इस्लामाबाद, 22 सितंबर (हि.स.)। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की 27 सितंबर को इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन की घोषणा से संघीय सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं। संघीय राजधानी को अभेद्य दुर्ग में बदला जा रहा है। संघीय सरकार ने स्थानीय अधिकारियों की मदद के लिए सिंध और पंजाब से हजारों अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को इस्लामाबाद में तैनात करने का निर्णय लिया है। पीटीआई ने जेल में बंद संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग की है।

द न्यूज की रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सिंध से लगभग 1,950 पुलिस अधिकारी और कर्मी मंगलवार रात तक इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। पंजाब भी 19,000 पुलिसकर्मी और अधिकारी उपलब्ध कराएगा और यह दल अगले दो दिनों में राजधानी पहुंच सकता है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि संघीय सरकार ने 23,000 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के लिए पंजाब से मदद मांगी थी। सूत्रों ने यह भी कहा कि सिंध, पंजाब और फ्रंटियर कॉर्प्स के कर्मियों के ठहरने की व्यवस्था भी पूरी कर ली गई है।

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) ने भी प्रस्तावित मार्च के संबंध में निर्देश जारी किए हैं। कहा गया है कि सार्वजनिक सड़कों और अन्य सुविधाओं में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद पुलिस ने एमएनए आदिल बजई को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे राजधानी में हिरासत में लिए गए पीटीआई सांसदों की संख्या छह हो गई है।

हिरासत में लिए गए सांसदों में सीनेटर सैफुल्ला नियाज़ी, एमएनए सनाउल्लाह मस्ती खेल, मियां अहसान जमाल, दावर कुंडी, गौस मुहम्मद और आदिल बजई शामिल हैं। उन्हें 'मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर' (एमपीओ) अध्यादेश की धारा 3 के तहत हिरासत में लिया गया है और झेलम जेल भेज दिया गया है।

इस बीच, विरोध प्रदर्शन के दौरान आवाजाही को रोकने की तैयारियों के तहत इस्लामाबाद में अलग-अलग स्थानों पर रात भर कंटेनरों की लंबी कतारों को वेल्डिंग के जरिए जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों ने 27 सितंबर के मार्च से पहले राजधानी में मुख्य प्रवेश और निकास बिंदुओं और प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए बड़ी संख्या में कंटेनरों की व्यवस्था की है।

पीटीआई ने कहा है कि मार्च होकर रहेगा। इमरान की पार्टी ने विरोध प्रदर्शन को अपना लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार बताया है। सोमवार को पेशावर में पीटीआई चेयरमैन बैरिस्टर गोहर अली खान ने कहा कि पार्टी संघीय स्तर पर संबंधित लोगों के संपर्क में है और हालिया गिरफ्तारियों को लेकर चिंतित है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदमों से स्थिति और बिगड़ सकती है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने भी 'लॉन्ग मार्च' के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि पीटीआई अपनी योजना के मुताबिक लोगों को एकजुट करने का काम जारी रखेगी।

इमरान के परिवार के सदस्यों की हिरासत ने तनाव और बढ़ा दिया है। उनकी बहन अलीमा खान की हिरासत के बाद उनकी अन्य बहनों नूरीन नियाजी और उजमा खान को भी हिरासत में ले लिया गया और 30 दिनों के लिए कोट लखपत जेल भेज दिया गया। अलीमा की हिरासत को चुनौती देने वाली एक याचिका लाहौर हाई कोर्ट में दायर की गई है।

गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने कहा है कि सरकार विरोध प्रदर्शनों के कारण होने वाली अव्यवस्था को दोबारा होने से रोकने के लिए एक स्थायी रणनीति अपनाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शनों के कारण इस्लामाबाद को 10 से 20 दिनों तक बंद नहीं रहने दिया जाएगा और कहा कि अगर पीटीआई मार्च करती है तो सरकार इस्लामाबाद हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करेगी।

इन कदमों का मकसद कानून-व्यवस्था बनाए रखना और रोजमर्रा की जिंदगी में बाधा को रोकना है। उधर, पीटीआई ने अपने नियोजित विरोध प्रदर्शन से पहले गिरफ्तारियों और अन्य प्रतिबंधों की आलोचना की है।

सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक संकट से निकलने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता बातचीत है। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से राजनीतिक नेताओं की एक समिति बनाने और सरकार तथा विपक्ष की बातचीत करने वाली टीमों को एक साथ बैठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी भी बातचीत में ऐसे अधिकार-संपन्न प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए जिनके पास फैसले लेने की शक्ति हो।

तहरीक-ए-तहफुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान (टीटीएपी) ने भी अलीमा खान की गिरफ्तारी की निंदा की और कहा कि इमरान को गलत तरीके से जेल में डाला गया है और अब उनके परिवार की महिलाओं को राजनीतिक बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है। टीटीएपी ने सांसदों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की गिरफ्तारियों के साथ-साथ कंटेनरों से हाइवे को ब्लॉक करने की भी निंदा की। उसने कहा कि शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के जवाब में ऐसे कदमों से राजनीतिक माहौल और ज्यादा खराब होगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

Share this story