पाकिस्तान ने वियना और जिनेवा में सिंधु जल संधि को बनाया मोहरा
वियना (ऑस्ट्रिया) /जिनेवा (स्विट्जरलैंड)/, 07 अक्टूबर (हि.स.)। पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को मोहरा बनाते हुए भारत को घेरने की कोशिश की। उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने तो वियना में इंटरनेशनल वॉटर सिम्पोजियम में भारत को गंभीर परिणाम की चेतावनी दे डाली। जिनेवा में सचिव (प्रथम) अदील मुमताज खोखर ने संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक दबाव बनाने के लिए पानी के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत का कदम पानी को हथियार बनाने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि साझा जल संसाधनों का इस्तेमाल दबाव डालने, राजनीतिक लाभ उठाने या युद्ध के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इशाक डार ने मंगलवार को वियना की डिप्लोमैटिक एकेडमी के तत्वावधान में आयोजित इंटरनेशनल वॉटर सिम्पोजियम (अंतरराष्ट्रीय जल संगोष्ठी) में कहा कि सिंधु जल का हिस्सा न देने की किसी भी कोशिश के क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। डार ने कहा कि इस्लामाबाद को पता है कि उसे अपने अधिकारों की रक्षा कैसे करनी है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल अप्रैल में भारत ने इस जल समझौते को स्थगित कर दिया था। यह कदम भारत ने कश्मीर में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद उठाया था। इसके बाद मई 2025 में दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष हुआ था। डार ने जोर देकर कहा कि सिंधु जल संधि और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने अधिकारों और हितों की रक्षा करने के पाकिस्तान के दृढ़ संकल्प के बारे में किसी को कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, सिंधु नदी का जल देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोगों की जिंदगी और रोजी-रोटी का जरिया है।
पाकिस्तान के सचिव (प्रथम) खोखर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में पाकिस्तान का पक्ष रखा। परिषद सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता के मानवाधिकार पर एक प्रस्ताव पर विचार कर रही थी। इस प्रस्ताव को जर्मनी और स्पेन ने पेश किया। इस प्रस्ताव को बिना मतदान के अपना लिया गया। खोखर ने कहा, जहां पानी साझा किया जाता है, वहां जिम्मेदारियां भी साझा होती हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के बीच साझा जल संसाधनों पर सहयोग कोई एहसान या रियायत का मामला नहीं है, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है।
खोखर ने कहा, कोई भी अपस्ट्रीम देश (नदी के बहाव की दिशा में ऊपर स्थित देश) पानी का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव या प्रभाव डालने के साधन के तौर पर नहीं कर सकता है। उन्होंने जोर दिया कि पानी का प्रबंधन सहयोग और आपसी जिम्मेदारी के सिद्धांतों के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव के साधन के तौर पर। खोखर ने सिंधु जल संधि से जुड़े भारत के एकतरफा कदम को पानी को हथियार बनाना बताया और कहा कि पानी कभी भी दबाव डालने, राजनीतिक लाभ उठाने या युद्ध का साधन नहीं बनना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

