पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए पनाह दी

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पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए पनाह दी


वाशिंगटन, 12 मई (हि.स.)। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने युद्ध में ईरान की अपरोक्ष रूप से मदद की। इस्लामाबाद में शांति वार्ता के समय पाकिस्तान ने चुपके से ईरानी सैन्य विमानों को अपने हवाई अड्डों पर खड़ा करने की अनुमति दी। अमेरिकी हवाई हमलों से ईरानी सैन्य विमानों को बचाने के मकसद से की गई पाकिस्तान की इस मदद का खुलासा सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों ने पहचान न उजागर करने की शर्त पर कहा कि यही नहीं ईरान ने पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी नागरिक विमान पार्क करने के लिए भेजे। कुल मिलाकर इन गतिविधियों से ईरान की शेष कुछ सैन्य और विमानन संपत्तियों को बढ़ते संघर्ष से बचाने का स्पष्ट प्रयास झलकता है, भले ही पाकिस्तान सार्वजनिक रूप से तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा था।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ युद्ध विराम की घोषणा के कुछ दिनों बाद तेहरान ने कई विमान पाकिस्तान वायु सेना बेस नूर खान भेजे। यह एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य जगह है। यह रावलपिंडी के ठीक बाहर स्थित है। इन सैन्य साजो-सामान में ईरानी वायु सेना का एक आरसी-130 विमान भी शामिल था। यह लॉकहीड सी-130 हरक्यूलिस सामरिक परिवहन विमान का एक टोही और खुफिया जानकारी जुटाने वाला संस्करण है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड इस घटनाक्रम से अनजान नहीं है। कमांड के निर्देश पर सीबीएस न्यूज ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के अधिकारियों इस पर टिप्पणी मांगी।

एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने नूर खान एयर बेस से जुड़े दावों को खारिज करते हुए कहा कि नूर खान बेस शहर के ठीक बीच में स्थित है। वहां पार्क किए गए विमानों के एक बड़े बेड़े को आम जनता की नजरों से छिपाया नहीं जा सकता।

अफगान नागरिक उड्डयन अधिकारी का इस संबंध में कहना है कि युद्ध शुरू होने से कुछ ही समय पहले महान एयर का एक ईरानी नागरिक विमान काबुल में उतरा था। ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद वह विमान काबुल हवाई अड्डे पर ही पार्क रहा। बाद में मार्च में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार के साथ तनाव के दौरान पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमले शुरू किए। आरोप लगाया गया कि अफगान तालिबान जिहादी आतंकवादी समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को पनाह दे रहा है। तब नागरिक उड्डयन अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से विमान को ईरानी सीमा के पास हेरात हवाई अड्डे पर ले जाने का फैसला किया। उड्डयन अधिकारी के अनुसार यह अफगानिस्तान में बचा हुआ एकमात्र ईरानी विमान था।

तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में किसी भी ईरानी विमान की मौजूदगी से इनकार किया है। पिछले एक दशक में सैन्य सहायता के लिए पाकिस्तान की चीन पर निर्भरता में भारी वृद्धि हुई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन से पता चला है कि चीन ने 2020 एवं 2024 के बीच पाकिस्तान के लगभग 80 फीसद प्रमुख हथियारों की आपूर्ति की और इस्लामाबाद के बीजिंग के साथ घनिष्ठ आर्थिक संबंध भी हैं। इस्लामाबाद ने संकट के मौके पर अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों को साधने की कोशिश की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

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