पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में 'विदेशी' से विवाह करने से पहले कर्मचारियों को लेनी होगी सरकार से अनुमति

WhatsApp Channel Join Now
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में 'विदेशी' से विवाह करने से पहले कर्मचारियों को लेनी होगी सरकार से अनुमति


इस्लामाबाद, 15 अप्रैल (हि.स.)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए विदेशी नागरिकों से शादी करने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री सोहेल खान अफरीदी के नए नियमों को मंजूरी दिए जाने के बाद लिया गया है। इस संबंध में प्रांतीय मानव संसाधन प्रबंधन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।

जियो न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, अधिसूचना में कहा गया कि अब से सरकारी कर्मचारियों को किसी विदेशी नागरिक से शादी करने से पहले आधिकारिक मंजूरी लेनी होगी। ऐसा न करने पर इसे कदाचार माना जाएगा और अनुशासनात्मक नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। अधिसूचना के अनुसार 'खैबर पख्तूनख्वा सिविल सर्वेंट्स (विदेशी नागरिकों से विवाह पर प्रतिबंध) नियम, 2026' को खैबर पख्तूनख्वा सिविल सर्वेंट्स अधिनियम, 1973 की धारा 26 के स्थान पर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

नियमों के तहत, विदेशी नागरिक की परिभाषा में कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल है जो पाकिस्तान का नागरिक नहीं है, जबकि विवाह में किसी भी लागू कानून या धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत संपन्न हुए मिलन शामिल हैं। सरकार ने कहा कि जो अधिकारी किसी विदेशी नागरिक से विवाह करना चाहते हैं, उन्हें उचित माध्यम से आवेदन करना होगा और सरकार से पहले अनुमति लेनी होगी। यह मंजूरी सरकार के विवेक पर दी जाएगी, जिसमें भावी जीवनसाथी की राष्ट्रीयता, उस व्यक्ति के देश के साथ पाकिस्तान के राजनयिक संबंध, और सुरक्षा या सेवा से जुड़े किसी भी संभावित प्रभाव जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाएगा।

ये नियम विदेशी जीवनसाथी के लिए गृह और जनजातीय मामलों के विभाग के माध्यम से संबंधित एजेंसियों द्वारा सुरक्षा और पहचान की जांच करवाना भी अनिवार्य बनाते हैं। आवेदकों को जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे, जिनमें चरित्र प्रमाण पत्र और एक हलफनामा शामिल है, जिसमें यह पुष्टि की गई हो कि विदेशी नागरिक किसी भी राष्ट्र-विरोधी या आपराधिक गतिविधियों में शामिल नहीं है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार उन सेवारत सरकारी कर्मचारियों के मामलों की भी समीक्षा करेगी जिन्होंने पहले से ही बिना पूर्व अनुमति के विदेशी नागरिकों से विवाह कर लिया है। ऐसे मामलों को विचार के लिए अधिकारियों के समक्ष नए सिरे से रखा जाएगा। अधिसूचना में कहा गया है कि इन नियमों का कोई भी उल्लंघन कदाचार माना जाएगा। ऐसा कहने पर बड़ी सजा हो सकती है। हालांकि, सरकार यदि जरूरी समझेगी तो विशिष्ट मामलों में इन नियमों में ढील दे सकती है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

Share this story