अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास से पहले उत्तर कोरिया ने दागी बैलिस्टिक मिसाइल
सियोल, 12 अगस्त (हि.स.)। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच होने वाले वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास से पहले उत्तर कोरिया ने बुधवार सुबह ईस्ट सी की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी। दक्षिण कोरियाई सेना के मुताबिक, यह एक सप्ताह से भी कम समय में उत्तर कोरिया का दूसरा मिसाइल लॉन्च है।
दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी योनहाप
के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) ने बताया कि मिसाइल लॉन्च का पता सुबह करीब 6 बजे पूर्वी तट के वॉनसन इलाके से चला। मिसाइल ने 700 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की। दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी अधिकारी इसके प्रकार और तकनीकी विशेषताओं का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं।
हालांकि सेना ने अभी मिसाइल के प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इसकी उड़ान दूरी को देखते हुए इसके कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल होने का अनुमान लगाया जा रहा है। उत्तर कोरिया के पास केएन-23 जैसी कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिन्हें रूस की इस्कंदर मिसाइल से मिलती-जुलती प्रणाली माना जाता है। इनकी अनुमानित अधिकतम रेंज 700-800 किलोमीटर है।
यह मिसाइल परीक्षण पिछले गुरुवार हुए लॉन्च के छह दिन बाद हुआ। उस समय दक्षिण कोरियाई सेना ने इसे कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल बताया था।
ताजा लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका अगले सप्ताह अपना प्रमुख वार्षिक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास शुरू करने वाले हैं। प्योंगयांग इन संयुक्त अभ्यासों की कड़ी आलोचना करता रहा है और इन्हें युद्ध की तैयारी बताता है।
उत्तर कोरिया पहले भी ऐसे सैन्य अभ्यासों के दौरान या उससे पहले अपने हथियारों का परीक्षण कर विरोध जताता रहा है।
उत्तर कोरिया आमतौर पर मिसाइल परीक्षण के अगले दिन सरकारी मीडिया के जरिए उसकी जानकारी देता है। हालांकि, पिछले सप्ताह हुए लॉन्च को लेकर प्योंगयांग ने कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की।
इससे विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि पिछला परीक्षण असफल रहा हो, किसी नई मिसाइल प्रणाली का परीक्षण किया गया हो या लंबी दूरी की मिसाइल को कम दूरी के प्रक्षेपवक्र पर दागा गया हो।
यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कोरियन स्टडीज के वरिष्ठ प्रोफेसर यांग मू-जिन ने कहा कि बुधवार का परीक्षण पिछले सप्ताह के लॉन्च को दोहराने की कोशिश हो सकता है, जो संभवतः विफल रहा था। उनके अनुसार, यह उत्तर कोरिया की मिसाइल क्षमताओं में सुधार के उद्देश्य से किया गया परीक्षण भी हो सकता है।
यांग ने यह भी कहा कि यूक्रेन में जारी युद्ध को देखते हुए उत्तर कोरिया ह्वासोंग-11 मिसाइलों को अपग्रेड करने की क्षमता का परीक्षण कर रहा हो सकता है। इन मिसाइलों को सामरिक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
जेसीएस के मुताबिक, दक्षिण कोरिया और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने लॉन्च के शुरुआती चरण से ही मिसाइल की निगरानी की। दोनों देशों ने जापान के साथ भी संबंधित जानकारी साझा की और करीबी सहयोग के जरिए अपनी सैन्य तैयारियां बनाए रखीं।
जेसीएस ने कहा कि मजबूत संयुक्त रक्षा व्यवस्था के तहत दक्षिण कोरियाई सेना उत्तर कोरिया की विभिन्न गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है और किसी भी उकसावे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
दक्षिण कोरिया के नेशनल सिक्योरिटी ऑफिस (एनएसओ) ने लगातार हो रहे मिसाइल लॉन्च पर चिंता जताई और प्योंगयांग से ऐसी उकसावे वाली कार्रवाइयां रोकने को कहा, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन माना जाता है।
बुधवार के लॉन्च के तुरंत बाद एनएसओ ने रक्षा और सैन्य अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की। बैठक में मिसाइल परीक्षण के सुरक्षा प्रभावों का आकलन किया गया और आवश्यक कदमों पर चर्चा हुई।
जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के विदेश नीति अधिकारियों ने फोन पर बातचीत की। तीनों देशों ने फिर से पुष्टि की कि उत्तर कोरिया का बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का उल्लंघन है।
तीनों अधिकारियों ने प्योंगयांग से ऐसी उकसावे वाली गतिविधियां बंद करने की अपील की, जो क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।
ताजा मिसाइल लॉन्च को दक्षिण कोरिया के गैंगवोन प्रांत के गोसोंग काउंटी के पूर्वी तटीय इलाके से भी देखा गया। यह इलाका वॉनसन से सीधी दूरी में करीब 130 किलोमीटर दूर है।
अमेरिकी पैसिफिक कमांड ने अपने मीडिया बयान में कहा कि शुरुआती आकलन के अनुसार उत्तर कोरिया का हालिया मिसाइल लॉन्च अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए कोई तत्काल खतरा पैदा नहीं करता।
बुधवार का यह परीक्षण इस साल अब तक उत्तर कोरिया का 11वां मिसाइल लॉन्च बताया गया है। दक्षिण कोरिया-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यास से पहले हुए इस परीक्षण से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और बढ़ने के संकेत मिले हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

