नेपाल में जेन जी सरकार बनने के बाद भी नहीं थमा विदेशों में बेरोजगारों का पलायन

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नेपाल में जेन जी सरकार बनने के बाद भी नहीं थमा विदेशों में बेरोजगारों का पलायन


- रोजगार की तलाश में हजारों युवा अभी भी विदेश जाने को मजबूर

काठमांडू, 29 जून (हि.स.)। नेपाल में जेन जी आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बावजूद रोजगार के लिए विदेश जाने वाले नेपाली युवाओं का पलायन थमता नजर नहीं आ रहा है। हर शाम हजारों युवा नेपालियों को काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पर देखा जा सकता है, जहां वे बेहतर रोज़गार की तलाश में दुनिया के विभिन्न देशों के लिए रवाना होने की तैयारी करते हैं। इनमें से कई युवाओं के साथ उनके परिवार के सदस्य भी भावुक विदाई देने पहुंचते हैं, जो देश में आजीविका की लगातार बनी चुनौती को दर्शाता है।

फिलहाल सरकार का नेतृत्व कर रही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने चुनाव प्रचार के दौरान नेपाल के भीतर रोजगार के अवसर पैदा करने और युवाओं के विदेश पलायन को रोकने का वादा किया था। पार्टी ने बढ़ते पलायन के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बावजूद अभी भी कई उद्योग संघर्ष कर रहे हैं और सीमित रोज़गार के अवसरों को लेकर चिंता बनी हुई है। हर दिन हजारों नेपाली युवा बेहतर आय और आर्थिक सुरक्षा की तलाश में भारत, मलेशिया, सिंगापुर सहित सभी खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका जैसे गंतव्यों के लिए देश छोड़ रहे हैं।

विदेश रवाना हो रहे कई युवाओं ने निराशा जताते हुए कहा कि सरकार बदलने के बाद नेपाल में ही काम मिलने की जो उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी। एयरपोर्ट का दृश्य न केवल व्यक्तिगत सपनों और आकांक्षाओं को दिखाता है, बल्कि देश की युवा कार्यशक्ति को देश में बनाए रखने की बड़ी चुनौती को भी उजागर करता है। लगातार जारी पलायन से नेपाल की पुरानी रोजगार और आर्थिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। देश के राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन श्रम पलायन की स्थिति लगभग जस की तस बनी हुई है।

श्रम तथा रोजगार मंत्री रामजी यादव ने कहा कि सरकार अपनी तरफ से इस प्रयास में लगी है कि युवाओं का पलायन रोका जा सके। नए रोजगार और काम के अवसर को उपलब्ध कराने के लिए सरकार की तरफ से दिन रात काम करने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले दिन में युवाओं के पलायन को कम होते देखा जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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