चीनी मॉडल से नहीं, नेपाल का विकास नेपाली मॉडल से ही संभव: ज्ञानेंद्र शाही

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चीनी मॉडल से नहीं, नेपाल का विकास नेपाली मॉडल से ही संभव: ज्ञानेंद्र शाही


काठमांडू, 04 जुलाई (हि.स.)। नेपाल के राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के संसदीय दल के नेता ज्ञानेंद्र शाही ने चीनी दूतावास से जुड़े एक कार्यक्रम में दो टूक कहा है कि नेपाल के विकास के लिए किसी भी विदेशी मॉडल की नकल नहीं की जानी चाहिए।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से आयोजित ‘चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 105 वर्ष: ऐतिहासिक अनुभव और नेपाल का विकास’ विषयक विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास बाहर से आयात करने का विषय नहीं है।

शाही ने ज़ोर देकर कहा कि नेपाल के भौगोलिक और सामाजिक परिवेश में अन्य देशों में सफल हुए विकास के मॉडल को हूबहू लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि नेपाल को अपनी मिट्टी और जमीनी हकीकत पर आधारित मौलिक मार्ग अपनाना चाहिए। राष्ट्रीय हित को केंद्र में रखकर नेपाल को अपना खुद का विकास मार्ग तैयार करना होगा।

शाही ने कहा कि नेपाल की मुख्य समस्या संभावनाओं की कमी नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने की कमजोरी है। शाही ने कहा, विकास बाहर से आयात की जाने वाली चीज़ नहीं है और न ही किसी दूसरे देश के विकास मॉडल की हूबहू नकल करके सफलता हासिल की जा सकती है। एक देश में सफल हुआ विकास मॉडल हिमालय की गोद में बसे नेपाल में जस का तस लागू नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि नेपाल प्राकृतिक संपदा, अपार जलस्रोत और दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (भारत और चीन) के बीच स्थित रणनीतिक भौगोलिक स्थिति से संपन्न राष्ट्र है, लेकिन क्रियान्वयन पक्ष कमजोर होने के कारण देश पिछड़ गया है।

नेपाल-चीन संबंधों पर ज्ञानेंद्र शाही ने कहा कि दोनों देशों के बीच का रिश्ता पारस्परिक सम्मान, संप्रभु समानता, भौगोलिक अखंडता के सम्मान और एक-दूसरे के मामलों में अहस्तक्षेप के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, शक्तिशाली और स्थिर नेपाल ही इस पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता का सबसे मजबूत आधार होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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