जलवायु न्याय तभी सार्थक जब मदद में जिम्मेदारी, क्षमता और संवेदनशीलता दिखे : शिशिर खनाल

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जलवायु न्याय तभी सार्थक जब मदद में जिम्मेदारी, क्षमता और संवेदनशीलता दिखे : शिशिर खनाल


काठमांडू, 26 सितंबर (हि.स.)। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि जलवायु न्याय तभी वास्तविक रूप से सार्थक होगा, जब देशों को मिलने वाली सहायता में उनकी जिम्मेदारी, क्षमता और जलवायु परिवर्तन के प्रति उनकी संवेदनशीलता को ध्यान में रखा जाए।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में नेपाल की ओर से आयोजित हाई-लेवल स्पेशल इवेंट ‘सगरमाथा टू द सी : ए कॉल टू एक्शन फॉर ए क्लाइमेट-रेजिलिएंट फ्यूचर (सागरमाथा से समुद्र तक: जलवायु-लचीले भविष्य के लिए कार्रवाई का आह्वान)’ को संबोधित करते हुए खनाल ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई प्राथमिकताओं पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि विज्ञान, नीतियों और निवेश में पहाड़ों, मीठे पानी की प्रणालियों और महासागरों के बीच मौजूद पारिस्थितिक संबंध को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने जलवायु संबंधी वैश्विक प्रक्रियाओं में पर्वतीय क्षेत्रों को अधिक महत्व देने की आवश्यकता भी बताई।

विदेश मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए बेहतर तैयारी, मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा, आपदा से पहले की कार्रवाई और वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता है।

खनाल ने विकासशील देशों के लिए पर्याप्त, अनुमानित और आसानी से उपलब्ध जलवायु वित्त की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की बात कही। उन्हाेंने कहा कि लॉस एंड डैमेज फंड को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के साथ इसे प्रभावित देशों के लिए अधिक सुलभ बनाना जरूरी है।

नेपाल के विदेश मंत्री ने जलवायु संकट से निपटने के लिए पहाड़ों से लेकर समुद्र तक जुड़े पारिस्थितिक तंत्र को एक साथ देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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